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आसन बैराज झील इस समय प्रवासी पक्षियों का प्रमुख स्थल बनी हुई है, जहां लगभग 5000 परिंदे जल क्रीड़ा कर रहे हैं। हालांकि, बार हेडेड गीज और ग्रे लेग गीज के न आने से पक्षी विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसका कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और मौसम चक्र में बदलाव को माना जा रहा है।
आसन बैराज झील इन दिनों प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बनी हुई है। यहां बड़ी संख्या में दुर्लभ और आकर्षक प्रवासी परिंदों के झुंड देखे जा रहे हैं। ये क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का मजबूत संकेत माने जा रहे हैं। आसन का राजा नाम से मशहूर पलाश फिश ईगल भी झील के ऊपर उड़ान भर रहा है। हालांकि इस बार अब तक बार हेडेड गीज और ग्रे लेग गीज परिंदों के नहीं आने से पक्षी विशेषज्ञ कुछ चिंतित भी दिखाई दे रहे हैं। इसका कारण लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध और मौसम चक्र में आए बदलाव को माना जा रहा है।
इन दिनों आसन बैराज झील में 45 प्रजातियों के करीब 5000 परिंदे जल क्रीड़ा कर पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं। आसन झील की उथली जलराशि, भरपूर जलीय वनस्पति, शांत वातावरण और कम मानवीय हस्तक्षेप इन्हें विश्राम और भोजन के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करता है। यही वजह है कि अक्टूबर से मार्च के बीच यहां इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। चकराता वन प्रभाग के वन दरोगा एवं पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सेना ने बताया कि किसी भी जलाशय में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी उस क्षेत्र के जल की गुणवत्ता, पारिस्थितिकी संतुलन और प्राकृतिक स्वास्थ्य को दर्शाती है। आसन झील में पलाश फिश ईगल जैसे दुर्लभ पक्षियों का आना यह स्पष्ट करता है कि यह आर्द्रभूमि अब भी प्रदूषण से काफी हद तक सुरक्षित है। चकराता वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे पक्षियों को परेशान न करें। झील क्षेत्र में प्लास्टिक और कचरा न फेंकें। इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में सहयोग करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आसन झील का संरक्षण इसी तरह किया गया तो भविष्य में यहां और भी दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की आमद देखने को मिल सकती है। फोटो 12------आसन झील में विचरण करते प्रवासी पक्षी। फोटो 13------आसन झील में विचरण करते प्रवासी पक्षी।

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