DA Image
25 फरवरी, 2020|1:20|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वरूणावत पर्वत के शिखर पर शुरू हुई श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा

वरूणावत पर्वत के शिखर पर शुरू हुई श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा

वरूणावत पर्वत के शिखर पर स्थित संग्राली गांव में देवी भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। वहीं नौ दिनों तक चलने वाले इस श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा में गांव की सुख समृद्धि के लिए हवन यज्ञ में आहुति डाली जा रही है।शनिवार को संग्राली गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में कंडार देवता मंदिर परिसर में एकत्र हुए।

यहां से उन्होंने क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता के अगुवाई में कलश यात्रा निकाली। जहां उन्होंने मंदिर में कलश स्थापित कर विशेष पूजा अर्चना की। पहले दिन व्यास पीठ से पं.दीवाकर नैथानी ने कहा कि देवी के अनेक रूप हैं। मनुष्य को कल्याण के लिए देवी के नौ रूपों को पूजन नौ दिनों में करना चाहिए। वर्ष में चार नवरात्र होते हैं। दो प्रगट और दो गुप्त नवरात्र। नवरात्रों में नौ दिनों तक प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों के पूजन का विधान है। कहा कि मनुष्य नवरात्रों के अलावा भी प्रत्येक माह प्रतिपदा से दशमी तिथि तक देवी पूजन कर सकता है। उन्होंने कहा कि नवरात्र में पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन सिद्धिदात्री और नवें दिन मां दुर्गा का पूजन करना चाहिए। नवरात्रों के अलावा भी मनुष्य प्रतिपदा से दशमी तिथि तक इसी कर्म से देवी का पूजन कर सकता है। दसवीं तिथि को हवन कर नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा देने से देवी प्रसन्न होती हैं। इस मौक पर पंडपाचार्य प्रदीप डिमरी, ग्राम प्रधान संदीप सेमवाल, ज्योति प्रसाद नैथानी, चंद्र मोहन भट्ट, धुव्र प्रसाद नैथानी, गोपाल नैथानी, नरेश भट्ट, गंगाशंकर, नरोत्तम नौटियाल आदि मौजूद थे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:The story of Srimad Devi Bhagwat Maha Purana started on the summit of Varunavat mountain