लोक कल्याण के लिए जरूरी है भागवत कथा: नौटियाल
पुरोला के करड़ा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन महाभंडारे के साथ हुआ। आचार्य शिव प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा, त्याग और समर्पण की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और लोक कल्याण के लिए भागवत कथा आवश्यक है। ग्रामीणों ने भावुकता के साथ विदाई दी और महाभंडारे का आयोजन किया।
पुरोला के करड़ा गांव में आयोजित श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ मंगलवार को सातवे दिन महाभंडारे के साथ संनल्न हो गया। कथा के अंतिम दिवस पर व्यास पीठ से आचार्य शिव प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा के लिए त्याग,समर्पण व श्रद्धा की महत्ता को समझाया। कहा कि सनातन संस्कृति व लोक कल्याण के लिए भागवत कथा जरूरी है। कथावक्ता आचार्य नौटियाल ने कहा कि हमारे धर्म शास्त्र,वेद पुराण व हमारा सनातन धर्म संस्कार युक्त समाज के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस घर मे धर्म संस्कृति हो घर पर संस्कारयुक्त व संस्कारी संतान होती है। श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर ग्रामीणों ने श्री शिकारू नाग महाराज,राजा रघुनाथ, मटिया महासू, रुद्रेश्वर देव डोलियों व कथा वक्ता श्री नौटियाल को भावुकता व श्रद्धापूर्ण विदाई दी व विशाल महाभण्डारे का आयोजन किया।
भागवत कथा के मुख्य आयोजक ज्योतिशाचार्य पँ0 घनश्याम रतूड़ी ने कहा कि गांव में श्रीमद भागवत का आयोजन सभी देवी देवताओ व पित्र देवों की कृपा की प्रेरणा है उन्होंने आयोजन में श्रधाव भावपूर्ण सहयोग के लिए सभी ग्रामीणों का धन्यवाद किया व सभी देवी दवताओं से गांव की सुख,समृद्धि व शांति की कामना की। अवसर पर मुख्य आयोजक शांति राम रतूड़ी,घनश्याम रतूड़ी, राम कृष्ण व मनोज रतूड़ी सहित,आचार्य गुरु प्रसाद सेमवाल, नितिन नौटियाल, विनोद रतूड़ी,जगमोहन रावत,जयेंद्र सिंह,बुद्धि सिंह भंडारी, कृषदेव, राजेन्द्र प्रसाद, केशर सिंह,धीरपाल रावत, सरदार सिंह, जवाहर सिंह,कपिल देव, गोपाल सिंह, दीवान सिंह, अंकित रावत आदि सैकड़ों श्रद्धालु व ग्रामीण मौजूद रहे।

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