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अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का परीक्षण करना जरूरी - डा. पंकज

कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के वैज्ञानिक डा़ पंकज नौटियाल ने बताया कि खेत की उपजाऊ शक्ति का सही अंदाजा लगाना आवश्यक है। ताकि यह तय किया जा सके कि निरन्तर अच्छी पैदावार पाने हेतु खेत में कौन-कौन सा उर्वरक कितनी मात्रा में डालना जाये। ऐसा मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना संभव है। कृषि विज्ञान केन्द्र चिन्यालीसौड़ के डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि चिन्यालीसौड़ क्षेत्र के दशकी, बिष्ट व हातड पट्टी के गाँव की मिट्टी के परीक्षण के बाद पता चला कि यहां की मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा 500 से 600 ग्राम प्रति हेक्टेयर है जबकि ये मात्रा 270 से 300 होनी चाहिए। नाइट्रोजन की अधिकता से मिट्टी में बोरोन व जिंक की मात्रा कम हो जाती है ऐसी मिट्टी में होने वाली फसलों की इम्युनिटी कम हो जाती है। जिससे इन फसलों में बहुत तीव्रता से बीमारी लगती है। इस प्रकार की मिट्टी में फसल, फल व सब्जी की वृद्धि नहीं हो पाती। वहीं दूसरी ओर नौगांव, पुरोला व मोरी की मिट्टी का प्रयोगशाला में परीक्षण करने के बाद पाया गया कि यहां के किसान यूरिया का ज्यादा छिड़काव कर देते हैं। इससे मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की भारी कमी हो जाती है। कहा कि कोई किसान अपने वर्षों के अनुभव के बावजूद भी अपने खेत की उपजाऊ शक्ति का सही-सही अन्दाजा नहीं लगा सकता। अक्सर किसी पोषक तत्व की कमी भूमि में धीरे-धीरे पनपती है और पौधों पर जब कमी के चिन्ह प्रगट होते हैं तो प्रायः काफी देर हो चुकी होती है और फसल की पैदावार पर विपरीत प्रभाव जोर पकड़ चुका होता है। कहा कि किसी खेत की उपजाऊ शक्ति का सही अंदाजा लगाने के लिए उसकी मिट्टी का परीक्षण करना जरूरी है। उन्होंने कृषकों को जानकारी देते हुए कहा कि कृषको को कैन खाद का प्रयोग कर मिट्टी में पोटास की मात्रा बनी चाहिए। वहीं मैग्नेशियम फोस्फेट का छिड़काव करें।

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  • Web Title:It is necessary to test soil for good yield - Dr Pankaj