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पूर्ण को जानकर पूर्ण हो जाना ही भक्ति है: राजपिता

पुरोला, संवाददाता। रविवार को पुरोला में निरंकारी संत समागम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। जिसमें निरंकारी राजपिता जी ने कहा कि सतगुरु के ब्रह्मज्ञान...

पूर्ण को जानकर पूर्ण हो जाना ही भक्ति है: राजपिता
हिन्दुस्तान टीम,उत्तरकाशीMon, 17 Jun 2024 03:30 PM
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रविवार को पुरोला में निरंकारी संत समागम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। जिसमें निरंकारी राजपिता ने कहा कि सतगुरु के ब्रह्मज्ञान से पूर्ण परमात्मा को जानकर जीवन को पूर्ण कर लेना ही मुक्ति है, यही भक्ति का सार भी है।
राजपिता ने कहा कि जिस प्रकार एक बूंद का सागर में मिलना ही लक्ष्य होता है, उसी प्रकार इस मनुष्य जीवन का लक्ष्य ईश्वर को जानकर भक्ति करना है। इस शरीर में रहकर यह आत्मा खुद को शरीर मान लेती है। सतगुरु द्वारा ब्रह्मज्ञान की दृष्टि जब प्राप्त हो जाती है तो फिर ऊंच, नीच का फर्क समाप्त हो जाता है फिर कण-कण में यह ईश्वर ही नज़र आता है। इस अवसर पर निरंकारी राजपिता ने पुरोला निरंकारी भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पुरोला के मुखी गोपाल सिंह चौहान, उत्तरकाशी संयोजक ओमप्रकाश जोशी समस्त साध संगत का आभार व्यक्त किया।

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