15 साल में 2.7 गुना बढ़ी कमाई, उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत से भी ज्यादा, जानिए कितनी
बजट दस्तावेज में जारी तुलनात्मक ग्राफ के अनुसार 2011-12 से लेकर 2025-26 तक राज्य के लोगों की औसत आय में लगभग तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे ठीक-ठीक बताया जाए, तो कुल 2.7 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उत्तराखंड सरकार के बजट में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में बीते करीब 15 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में तेज बढ़ोतरी हुई है। बजट दस्तावेज में जारी तुलनात्मक ग्राफ के अनुसार 2011-12 से लेकर 2025-26 तक राज्य के लोगों की औसत आय में लगभग तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे ठीक-ठीक बताया जाए, तो कुल 2.7 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
15 साल में 2.7 गुना बढ़ी कमाई
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011-12 में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय करीब 100314 रुपये थी। वहीं ताजा अनुमान 2025-26 में यह बढ़कर 273921 रुपये तक पहुंच गई है। यानी करीब 173600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह 15 साल में राज्य की औसत आय लगभग 2.7 गुना बढ़ गई है।
राष्ट्रीय औसत से कितना आगे है उत्तराखंड
अगर राष्ट्रीय औसत से तुलना करें तो उत्तराखंड लगातार आगे बना हुआ है। वर्ष 2011-12 में भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 63462 रुपये थी, जबकि उत्तराखंड में यह 100314 रुपये थी। उस समय भी राज्य राष्ट्रीय औसत से करीब 37 हजार रुपये अधिक था।
ताजा अनुमान 2025-26 के अनुसार पूरे भारत में औसत प्रति व्यक्ति आय करीब 219575 रुपये है, जबकि उत्तराखंड में यह 273921 रुपये आंकी गई है। यानी वर्तमान में भी राज्य के लोग राष्ट्रीय औसत से करीब 54346 रुपये ज्यादा कमा रहे हैं।
डेढ़ दशक से लगातार मजबूती आई, आगे भी अनुमान
बजट में पेश किए गए ये आंकड़े संकेत देते हैं कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पिछले डेढ़ दशक में लगातार मजबूती आई है और उत्तराखंड आय के मामले में देश के औसत से आगे बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में पर्यटन, सेवा क्षेत्र और उद्योगों के विस्तार ने राज्य की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रति व्यक्ति आय को समझिए
चलते-चलते समझिए प्रति व्यक्ति आय क्या होती है। इसका मतलब है कि किसी राज्य या देश में रहने वाले हर व्यक्ति के हिस्से औसतन कितनी आय आती है। इसे निकालने के लिए उस राज्य या देश की कुल आय (अर्थव्यवस्था से होने वाली कमाई) को वहाँ की कुल आबादी से भाग दिया जाता है। इससे यह अंदाज़ा मिलता है कि औसतन एक व्यक्ति कितनी कमाई करता है।
जानिए यह कैसे मापी जाती है
इसे मापने के लिए सरकार अर्थव्यवस्था की कुल आय यानी GDP या राज्य स्तर पर GSDP का इस्तेमाल करती है। फिर इस कुल आय को उस साल की आबादी से भाग देकर प्रति व्यक्ति आय निकाली जाती है। इससे अलग-अलग राज्यों या देशों की आर्थिक स्थिति की तुलना करना आसान हो जाता है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
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रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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