Uttarakhand weather update: अगले 24 घंटे में भारी बारिश का अलर्ट, 50 की रफ्तार से हवा भी चलेगी
उत्तराखंड में 86 साल में मई में एक दिन में दूसरी बार सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बीच मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश की संभावना जताकर अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजल चमकने और 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से झोंके दार हवाएं चलने का अनुमान है।

Uttarakhand weather update: उत्तराखंड में 86 साल में मई में एक दिन में दूसरी बार सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बीच मौसम विभाग ने बताया है कि पहाड़ी जिलों में आने वाले एक सप्ताह में हल्की बारिश के आसार हैं। राज्य के विभिन्न जनपदों के कुछ स्थानों में रविवार को हल्की से मध्यम बारिश व 3800 मीटर से ऊंचाई वाले स्थानों में बर्फबारी होने की संभावना है।
पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजल चमक सकती और 40-50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से झोंके दार हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश की संभावना जताकर अलर्ट जारी किया है। आज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है।
अधिकतम तापमान में गिरावट
पिछले 24 घंटे में कई बार हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया। अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। शनिवार दोपहर करीब तीन बजे आसमान में काले बादल छा गए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। इसके बाद बिजली की गड़गड़ाहट के साथ साढ़े तीन बजे तेज बारिश होने लगी। साथ ही तेज हवाएं चलीं जिसके बाद राजपुर रोड पर पेड़ गिर गया। अंधड़ के साथ धूल-गंदगी आने पर राजपुर रोड क्षेत्र में कुछ दुकानों को बंद करना पड़ा।
मई में एक दिन में दूसरी बार सर्वाधिक बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून में बीते 24 घंटे के दौरान 69 मिमी बारिश दर्ज की गई। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, उत्तराखंड में 86 साल में मई में एक दिन में दूसरी बार सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। 1940 में 28 मई को एक दिन में सर्वाधिक 79 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद मई माह में एक दिन में दर्ज होने वाली यह दूसरी सबसे अधिक बारिश है। देहरादून में शनिवार को अधिकतम तापमान 33.8 और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री रिकार्ड किया गया।
मसूरी में जनजीवन प्रभावित
शहर में शनिवार को तेज बारिश के साथ ही आंधी ने पर्यटकों और लोगों की चिंता बढ़ा दी। बारिश और अंधड़ के कारण पर्यटक होटल की ओर लौट गए। पर्यटन नगरी मसूरी में दोपहर बाद तीन बजे मौसम ने करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बारिश के साथ अंधड़ चलना शुरू हो गया। इस दौरान मालरोड से अधिकांश पर्यटक होटलों की ओर लौट गए। शनिवार को दोपहर में मौसम बदलने के बाद यहां पर काफी ठंडा हो गया।
पार्क की सुरक्षा दीवार ढही
दून विहार वार्ड स्थित भागीरथीपुरम कॉलोनी में एमडीडीए की ओर से करीब 99.30 लाख रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे पार्क की सुरक्षा दीवार शनिवार को पहली ही बारिश में भरभराकर ढह गई। दीवार गिरने से उसके पास खड़े कई लोडिंग वाहन और दोपहिया वाहन मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि घटना के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। उधर, जाखन-जोहड़ी रोड पर एक विशाल पेड़ गिरने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। पार्षद ने वन विभाग को सूचित कर पेड़ हटाने और यातायात बहाल करने की मांग की है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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