Hindi Newsउत्तराखंड न्यूज़uttarakhand high court seeks records of prisoners whose appeals not filed for log time
वर्षों से जिनकी नहीं दाखिल हुई अपील, उन कैदियों को राहत; उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

वर्षों से जिनकी नहीं दाखिल हुई अपील, उन कैदियों को राहत; उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

संक्षेप:

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पाया कि एक कैदी 22 वर्षों से बिना अपील के जेल की काल कोठरी में बंद है। अदालत ने ऐसे मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को उन कैदियों का ब्यौरा मांगा है जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं।

Jan 01, 2026 01:12 am ISTKrishna Bihari Singh भाषा, देहरादून
share Share
Follow Us on

उत्तराखंड की जेलों में वर्षों से कैद उन कैदियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने ऐसे कैदियों का ब्यौरा तलब किया है जिनकी वर्षों से अपील अदालत के समक्ष दाखिल नहीं हो पाई हैं और जिनके कोई पैरोकार नहीं हैं। अदालत ने एक मामले में पाया कि एक कैदी 22 वर्षों से बिना अपील के सजा काट रहा है। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को उन कैदियों की संख्या बताने को कहा जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं। इस पहल का मकसद लाचार कैदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है ताकि उनके न्याय के अधिकार की रक्षा हो सके।

22 साल से जेल की काल कोठरी में था शख्स

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जेलों में सजा काट रहे उन कैदियों का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया जाए जिनकी अपील अभी तक नहीं दायर हुई है। अदालत ने एक केस में सुनवाई की जिसमें पाया कि अपीलकर्ता बीते 22 साल से जेल में सजा काट रहा है लेकिन उसकी अपील कभी भी हाईकोर्ट तक नहीं पहुंची है।

ऐसे कैदियों का मांगा ब्यौरा

अदालत ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को ऐसे मामलों का पता लगाने और उन कैदियों की संख्या पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं। अदालत ने यह आदेश इसलिए दिया ताकि उन असहाय कैदियों को वकील उपलब्ध कराए जाएं और उन्हें कानूनी मदद मुहैया कराई जा सके।

ताकि न्याय के अधिकार की रक्षा की जा सके

इस संबंध में एक वकील ने अदालत को बताया कि जेल में बंद कैदियों को जरूरत कानूनी सेवाएं प्रदान करना विधिक सेवा प्राधिकरण, जेल महानिरीक्षक और जेल अधीक्षकों की जिम्मेदारी है ताकि जिन लोगों की अपीलें अभी तक दायर नहीं की गई हैं उनकी अपीलें दायर की जा सकें। ऐसे लाचार लोगों को कानूनी मदद दिलाकर उनके न्याय के अधिकार की रक्षा की जा सके।

Uttarakhand High Court Order

इतनी देरी क्यों होती है?

एक अन्य मामले में एक अपील 1,299 दिनों की देरी से दायर की गई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए अदालत ने पूछा था कि इतनी देरी क्यों होती है। पता चला कि जेल में आने वाले लोगों और वकीलों की ओर से जिस प्रारूप में कैदियों की ओर से अपील की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी जाती है उसमें दर्ज करने का कोई प्रावधान ही नहीं है कि क्या कोई अपील दाखिल की गई है या नहीं। यदि नहीं की गयी है तो इसका कारण क्या है।

जेल अधिकारी बताएंगे हर कैदी की स्थिति

यह भी उल्लेख करने का प्रावधान नहीं है जैसे कि क्या कैदी को प्राइवेट वकील की जरूरत है या वह अपील दायर नहीं करना चाहता है। इस संबंध में अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक संशोधित प्रारूप जारी किया है। अब जेल अधिकारी हर कैदी की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे कि उसकी अपील दायर की गई है या नहीं। इस आधार पर विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करेगा या अपील दायर करने में उनकी मदद करेगा।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

;;;