
वर्षों से जिनकी नहीं दाखिल हुई अपील, उन कैदियों को राहत; उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पाया कि एक कैदी 22 वर्षों से बिना अपील के जेल की काल कोठरी में बंद है। अदालत ने ऐसे मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को उन कैदियों का ब्यौरा मांगा है जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं।
उत्तराखंड की जेलों में वर्षों से कैद उन कैदियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने ऐसे कैदियों का ब्यौरा तलब किया है जिनकी वर्षों से अपील अदालत के समक्ष दाखिल नहीं हो पाई हैं और जिनके कोई पैरोकार नहीं हैं। अदालत ने एक मामले में पाया कि एक कैदी 22 वर्षों से बिना अपील के सजा काट रहा है। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को उन कैदियों की संख्या बताने को कहा जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं। इस पहल का मकसद लाचार कैदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है ताकि उनके न्याय के अधिकार की रक्षा हो सके।
22 साल से जेल की काल कोठरी में था शख्स
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जेलों में सजा काट रहे उन कैदियों का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया जाए जिनकी अपील अभी तक नहीं दायर हुई है। अदालत ने एक केस में सुनवाई की जिसमें पाया कि अपीलकर्ता बीते 22 साल से जेल में सजा काट रहा है लेकिन उसकी अपील कभी भी हाईकोर्ट तक नहीं पहुंची है।
ऐसे कैदियों का मांगा ब्यौरा
अदालत ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को ऐसे मामलों का पता लगाने और उन कैदियों की संख्या पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जिनकी अपीलें अभी तक हाईकोर्ट में दायर नहीं की गई हैं। अदालत ने यह आदेश इसलिए दिया ताकि उन असहाय कैदियों को वकील उपलब्ध कराए जाएं और उन्हें कानूनी मदद मुहैया कराई जा सके।
ताकि न्याय के अधिकार की रक्षा की जा सके
इस संबंध में एक वकील ने अदालत को बताया कि जेल में बंद कैदियों को जरूरत कानूनी सेवाएं प्रदान करना विधिक सेवा प्राधिकरण, जेल महानिरीक्षक और जेल अधीक्षकों की जिम्मेदारी है ताकि जिन लोगों की अपीलें अभी तक दायर नहीं की गई हैं उनकी अपीलें दायर की जा सकें। ऐसे लाचार लोगों को कानूनी मदद दिलाकर उनके न्याय के अधिकार की रक्षा की जा सके।

इतनी देरी क्यों होती है?
एक अन्य मामले में एक अपील 1,299 दिनों की देरी से दायर की गई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए अदालत ने पूछा था कि इतनी देरी क्यों होती है। पता चला कि जेल में आने वाले लोगों और वकीलों की ओर से जिस प्रारूप में कैदियों की ओर से अपील की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी जाती है उसमें दर्ज करने का कोई प्रावधान ही नहीं है कि क्या कोई अपील दाखिल की गई है या नहीं। यदि नहीं की गयी है तो इसका कारण क्या है।
जेल अधिकारी बताएंगे हर कैदी की स्थिति
यह भी उल्लेख करने का प्रावधान नहीं है जैसे कि क्या कैदी को प्राइवेट वकील की जरूरत है या वह अपील दायर नहीं करना चाहता है। इस संबंध में अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक संशोधित प्रारूप जारी किया है। अब जेल अधिकारी हर कैदी की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे कि उसकी अपील दायर की गई है या नहीं। इस आधार पर विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करेगा या अपील दायर करने में उनकी मदद करेगा।

लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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