अतिक्रमण मामले पर उत्तराखंड HC सख्त, मुख्य सचिव को तलब किया
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश में राजमार्गों, सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाये जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव को आगामी 19 दिसंबर को वर्चुअल रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश में राजमार्गों, सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाये जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन को आगामी 19 दिसंबर को वर्चुअल रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेन्दर और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की पीठ ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। न्यायमित्र अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली की ओर से कहा गया कि अदालत ने 17 अक्टूबर, 2023 को एक आदेश जारी किया था। इसके अनुसार प्रदेश सरकार को जिला स्तर पर सभी जिलाधिकारियों की अगुवाई में एक कमेटी गठित करने और सुनवाई के बाद अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का उचित अनुपालन नहीं किया गया है।
यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले साल एक आदेश जारी कर सभी राज्य सरकारों को अतिक्रमणकारियों को उचित सुनवाई का मौका देने का निर्देश दिया था। उन्होंने आगे कहा कि कुछ अतिक्रमणकारियों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने तीन और सात दिन का नोटिस जारी कर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया है इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
दूसरी ओर सरकार की ओर से भी कहा गया कि राज्य सरकार ने आदेश का अनुपालन किया है। जिलों में कमेटियों का गठन किया गया है। सभी जिलाधिकारियों ने जवाबी हलफनामा दायर किया है। सभी को सुनवाई का मौका दिया जा रहा है। अंत में अदालत ने मुख्य सचिव को 19 दिसंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है। दरअसल, नैनीताल जनपद के पदमपुरी और खुटानी में सड़क किनारे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रभात गांधी ने हाई कोर्ट को एक पत्र लिखा था।
हाई कोर्ट ने इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दायर कर ली। पत्र में कहा गया है कि पदमपुरी-खुटानी राजमार्ग के किनारे सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण कर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाये गये हैं। यहां तक कि एक मंदिर का निर्माण भी किया या गया है।
इसके बाद अदालत ने इस मामले का वृहद संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी राज मार्गों और सड़कों से सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दे दिये थे। अदालत ने सभी डीएम और डीएफओ को अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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