उत्तराखंड में पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे उपनल कर्मचारी, सरकार ने जारी किया आदेश

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, देहरादून
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उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 22 हजार से ज्यादा उपनल कर्मचारियों के अनुबंध के संबंध में सरकार ने गुरुवार को आदेश कर दिए। इसके बाद इनका मानदेय सीधे बैंक खातों में जाएगा। हालांकि भविष्य में उपनल कर्मचारी नियमितीकरण का दावा नहीं कर पाएंगे।

उत्तराखंड में पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे उपनल कर्मचारी, सरकार ने जारी किया आदेश

उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 22 हजार से ज्यादा उपनल कर्मचारियों के अनुबंध के संबंध में सरकार ने गुरुवार को आदेश कर दिए। इसके बाद इनका मानदेय सीधे बैंक खातों में जाएगा। हालांकि भविष्य में उपनल कर्मचारी नियमितीकरण का दावा नहीं कर पाएंगे।

कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के संयुक्त सचिव राजेन्द्र सिंह पतियाल ने हाईकोर्ट के निर्देश के तहत विभागीय अनुबंध की शर्तें जारी कर दी हैं। इसके तहत, बीती तीन फरवरी को जारी जीओ के अनुसार, 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके उपनलकर्मियों का विभाग के साथ अनुबंध होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी प्रकृति की होगी। इससे कर्मचारी पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे।

हालांकि, विभाग जरूरत के अनुसार कर्मचारी का ट्रांसफर या समकक्ष पद पर समायोजन कर सकेगा। कर्मचारियों का मानदेय निर्धारण सैनिक कल्याण विभाग के जीओ के अनुसार होगा। डीए भी दिया जाएगा। सेवा विस्तार का निर्णय अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद तय प्रक्रिया के तहत होगा। अनुबंध के तहत कर्मियों को वर्ष में 12 दिन का आकस्मिक और 15 दिन का उपार्जित अवकाश मिलेगा।

उपनल कर्मी बोले, अनुबंध के नाम पर धोखा

विभागीय अनुबंध के आदेश को उपनल कर्मचारियों ने उनके साथ धोखा करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे नियमितीकरण का रास्ता बंद किया जा रहा है। साथ ही हर साल अनुबंध खत्म होने की आड़ में बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

उपनल कर्मचारी महासंघ की देहरादून में गुरुवार शाम को बैठक हुई। इसमें अनुबंध को लेकर जारी शासनादेश की समीक्षा की गई। अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा कि सभी उपनल कर्मचारी असमंजस में हैं। क्योंकि जो बातें उनके साथ की गई, वह कहीं भी अनुबंध की शर्तों में नजर नहीं आ रही हैं। इस तरह से विभागीय अनुबंध हुआ तो कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात ही खत्म हो जाएगी। उपनल कर्मचारी इस बात को कानूनी तौर पर कहीं भी नहीं उठा सकेंगे।

उन्होंने आशंका जताई कि 11 महीने के अनुबंध को अगले वर्ष के लिए जब दोबारा किया जाएगा तो कई विभाग इसमें टालमटोल कर उपनल से विभागीय अनुबंध पर आए कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा देंगे। उन्होंने कहा कि संघ ने बैठक में इस मामले को रखा है और संशोधित शासनादेश जारी करवाने के लिए वह सैनिक कल्याण मंत्री से मुलाकात करेंगे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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