उत्तराखंड के युवाओं के सपनों को उड़ान, बजट में 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' के लिए खोला खजाना
Mukhyamantri Swarozgar Yojana: सीएम पुष्कर धामी ने 111703.21 करोड़ का बजट पेश किया। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है। युवाओं के लिए महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' के लिए 60 करोड़ की राशि का विशेष पैकेज दिया गया है।

Mukhyamantri Swarozgar Yojana: उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 9 मार्च को 111703.21 करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया। यह बजट पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। सीएम ने गैरसैंण विधानसभा में सभी विभागों और सभी वर्गों के लिए बजट का खजाना खोला। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और राज्य से पलायन की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में धामी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' के लिए 60 करोड़ की राशि का विशेष ऐलान किया है।
उत्तराखंड बजट में इस योजना को 'SANTULAN' (संतुलन) मॉडल के 'L' यानी 'Livelihood' (आजीविका) स्तंभ के तहत रखा गया है। 60 करोड़ रुपये की यह राशि राज्य के उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपने गांव और शहर में रहकर खुद का उद्योग या सेवा क्षेत्र का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
इस योजना के तहत आवंटित बजट का उपयोग लाभार्थियों को कई क्षेत्रों में मदद देने के लिए किया जाएगा। इसमें सब्सिडी सहायता के तहत मैनुफेक्चरिंग और सर्विस क्षेत्र में अपना काम शुरू करने वाले युवाओं को प्रोजेक्ट लागत पर आकर्षक सब्सिडी दी जाती है। आसान ऋण प्रक्रिया के तहत बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दर और आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। अन्य क्षेत्रों जैसे ब्यूटी पार्लर, बुटीक, फोटोकॉपी की दुकान से लेकर छोटे विनिर्माण उद्योग, बेकरी और हस्तशिल्प में भी युवा लाभ ले सकेंगे।
पलायन रोकने पर फोकस
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पलायन एक बड़ी चुनौती रही है। सरकार का मानना है कि 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' के लिए 60 करोड़ का आवंटन सीधे तौर पर पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। जब युवाओं को अपने घर के पास ही व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी, तो वे बड़े शहरों की ओर रुख करने के बजाय अपनी मातृभूमि पर ही विकास के इंजन बनेंगे।
बजट में अन्य घोषणाएं
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में स्वरोजगार के एक मजबूत इकोसिस्टम के लिए चौतरफा रणनीति अपनाई है, जिसमें केवल वित्तीय सहायता ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे और कौशल विकास को भी समान महत्व दिया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की रीढ़ को मजबूत करने के लिए 75 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जो स्थानीय स्तर पर औद्योगिक इकाइयों के विस्तार में सहायक होगा। इसके साथ ही, राज्य के युवाओं में नवाचार और उद्यमिता की भावना जगाने के लिए स्टार्टअप संस्कृति और निवेश प्रोत्साहन हेतु 30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन आर्थिक प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने कौशल विकास पर भी गहरा जोर दिया है, जिसके तहत युवाओं को आधुनिक तकनीकी रूप से दक्ष बनाने हेतु विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, ताकि वे न केवल स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें बल्कि तकनीकी रूप से भी प्रतिस्पर्धी बन सकें।
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