उत्तराखंड बजट 2026: भाजपा सरकार ने किस विभाग के लिए कितना खोला खजाना, किसे सबसे कम फंड

Mar 09, 2026 05:55 pm ISTGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, गैरसैंण
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उत्तराखंड बजट 2026 में सबसे अधिक लोक निर्माण विभाग के लिए 2501.91 करोड़ की घोषणा की गई है। भूस्खलन, भारी बारिश और दुर्गम इलाकों के कारण हर साल सैकड़ों गांव कट जाते हैं, जो सरकार के लिए चुनौती साबित होती है।

उत्तराखंड बजट 2026: भाजपा सरकार ने किस विभाग के लिए कितना खोला खजाना, किसे सबसे कम फंड

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा बजट (111703.21 करोड़) पेश किया। विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग मदों में धनराशि की घोषणा की गई है। विभागवार नजर डालें तो धामी सरकार ने लोक निर्माण विभाग के लिए दिल खोलकर खजाना खोला है। दूसरी ओर कला एवं संस्कृति विभाग के लिए सबसे कम धनराशि का ऐलान हुआ है।

लोक निर्माण विभाग को 2501.91 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो सभी विभागों में सबसे अधिक है। इस विभाग के जरिए राज्य में सड़कों के निर्माण, मरम्मत और संपर्क मार्गों को बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में सड़क संपर्क एक बड़ी चुनौती रहा है। भूस्खलन, भारी बारिश और दुर्गम इलाकों के कारण हर साल सैकड़ों गांव कट जाते हैं।

2501.91 करोड़ के साथ पीडब्ल्यूडी विभाग नई सड़कें, पुराने पुलों का मरम्मत कर सकेगा और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आवंटन चारधाम यात्रा मार्गों के विस्तार और ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट को गति देगा, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। पिछले वर्षों में लोक निर्माण पर खर्च से 20% से अधिक सड़क लंबाई बढ़ी है और इस बार का बजट इसे और तेज कर सकता है।

पेयजल विभाग दूसरे नंबर पर

दूसरे स्थान पर पेयजल विभाग है, जिसके लिए 1827.91 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग को 1642.20 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 1609.43 करोड़ का बजट दिया गया है, जिससे गांवों में आधारभूत सुविधाओं और बिजली आपूर्ति को मजबूत किया जा सके।

शहरी विकास के लिए 1401.85 करोड़

शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए शहरी विकास विभाग को 1401.85 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं आवास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए 291 करोड़ और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 195.46 करोड़ तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग को 126.37 करोड़ दिए गए हैं।

माध्यमिक शिक्षा के लिए 542.84 करोड़

शिक्षा क्षेत्र की बात करें तो माध्यमिक शिक्षा विभाग को 542.84 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 146.30 करोड़ और तकनीकी शिक्षा विभाग को 98.50 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए खेल विभाग को 69.94 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को 86 करोड़, परिवहन विभाग को 67.45 करोड़ और नागरिक उड्डयन विभाग को 52.50 करोड़ दिए गए हैं।

कृषि के लिए 74 करोड़

कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में औद्यानिक विकास विभाग को 74 करोड़, पशुपालन विभाग को 47 करोड़ और मत्स्य विकास विभाग को 30.13 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वन विभाग को 131.68 करोड़ और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को 98.45 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

कला और संस्कृति विभाग के खाते में 10 करोड़ से भी कम

इन सभी विभागों के बीच सबसे कम बजट कला एवं संस्कृति विभाग को मिला है, जिसके लिए केवल 9.90 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि अन्य विभागों की तुलना में काफी कम है।

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