रूस में 97 दिनों से फंसे दो भाई भारत लौटे, 14 घंटे काम पर खाने को मिलता एक पाव-अंडा; आपबीती
रूस में करीब 97 दिनों से फंसे दो भाई सुरक्षित भारत लौट आए हैं। उन्होंने अपनी आपबीती आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से साझा की। बताया कि कैसे 14-14 घंटे काम पर खाने को सिर्फ एक पाव और एक अंडा मिलता था।

संतोष आर्यन, पिथौरागढ़
मशहूर फिल्म अभिनेता शाहरुख खान की फिल्म डंकी समेत विदेश यात्रा पर बनी तमाम बॉलीवुड फिल्में तो आपने देखी होंगी, जिनमें गांव-कस्बों के युवा हाथ में पासपोर्ट और आंखों में चमकते भविष्य का सपना लिए सात समंदर पार का रुख करते हैं और फिर विदेश पहुंचते ही उन्हें अमानवीय व्यवहार, मजबूरी की जिंदगी, पासपोर्ट जब्ती का खौफ झेलना पड़ता है। दो भाई आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की की कहानी भी ऐसी ही है। रूस में करीब 97 दिनों से फंसे रहने के बाद उनकी सकुशल भारत वापसी हुई है। इन्होंने अपनी आपबीती आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से साझा की है।
दोनों भाई उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित अपने घर लौट आए हैं। आपके अपने प्रिय अखबार हिन्दुस्तान ने परिवार की व्यथा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर को संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोनों भाइयों की वापसी के लिए लगातार प्रयासरत थे।
बैंक से कर्ज लेकर रूस नौकरी के लिए गए
रील लाइफ की यह कहानी पिथौरागढ़ के दो भाईयों ने रियल लाइफ में महसूस की। बैंक से 8 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज लेकर रूस पहुंचे आनंद सिंह कार्की और उनके भाई की यह दास्तान देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक सीधी चेतावनी है, जो रील की चमक-धमक देखकर और एजेंटों के दावों के बहकावे में आकर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। आपके अपने ‘हिन्दुस्तान अखबार’ से बातचीत के जरिए आनंद सिंह कार्की ने अपनी आपबीती साझा की।
भोजन में केवल एक बंद और अंडा
दिनभर की कमरतोड़ मजदूरी के बाद खाने के नाम पर पूरे दिन में केवल एक पाव और एक अंडा दिया जाता था। पीने के पानी की एक बोतल के लिए 100 रुपये चुकाने पड़ते थे। आनंद सिंह कार्की ने अपनी दास्तान साझा करते हुए बताया कि सितारगंज के एजेंट ने उन्हें रूस की नामी कंपनी में 10 घंटे काम और 60 से 80 हजार रुपये प्रति माह वेतन का झांसा दिया था। इसके लिए बैंक से 8 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज लेकर वे 6 मई को रूस पहुंचे थे। रूस पहुंचते ही एजेंट के वादों का सच सामने आ गया। जिस नामी कंपनी का वादा किया गया था, वह फर्जी निकली और दोनों भाइयों को एक अज्ञात स्थान पर साउथ अफ्रीकी ठेकेदार के अधीन भारी मजदूरी में झोंक दिया गया। उनसे 14-14 घंटे काम कराया जाता था।
सरकार के प्रयास से वतन लौट पाए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दोनों की सुरक्षित वापसी के निर्देश दिए थे। सरकार ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास से लगातार समन्वय किया। इससे दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी। इस दौरान यूकेडी नेता काशी सिंह ऐरी और समाजसेवी रामदेव वर्मा ने भी परिवार के साथ समन्वय में सहयोग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेश में संकट में फंसे उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक की सहायता के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। दोनों की वापसी के बाद मुख्यमंत्री ने फोन पर उनसे बातचीत कर कुशलक्षेम जानी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। लंबे समय बाद बेटों के घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली और मुख्यमंत्री का आभार जताया।
चार रातें जंगल में काटी, 17 दिन एक ही कपड़े में बीते
आनंद ने बताया कि सितारगंज के एजेंट ने उन्हें रूस की एक नामी कंपनी में 10 घंटे काम और 60 से 80 हजार रुपये महीने का वेतन दिए जाने का सपना दिखाया। लेकिन जैसे ही दोनों भाइयों के कदम छह मई को रूस की सरजमीं पर पड़े, तो सपनों के ताश का महल ढह गया। जिस कंपनी का वादा किया गया था, वह पूरी तरह फर्जी निकली और दोनों भाइयों को एक अज्ञात जगह पर मजदूरी में झोंक दिया गया। बताया कि रूस पहुंचते ही उन्हें किसी कमरे या हॉस्टल में नहीं, बल्कि चार रातों तक जंगलों में रहने पर मजबूर किया गया। 17 दिन उन्होंने एक ही जोड़े कपड़े में बिताए।
परिजनों ने जताया आभार
पिथौरागढ़। घर वापस लौटे आनंद और भूपेंद्र का उनकी गर्भवती पत्नी तनुजा और परिजनों ने भावुक होकर स्वागत किया। परिजनों ने 'हिन्दुस्तान' का आभार जताया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फोन पर दोनों भाईयों से बात की। परिजनों ने मुख्यमंत्री का भी आभार जताकर एजेंट से विदेश में नौकरी के नाम पर ली धनराशि को वापस दिलाने की मांग की है।
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