स्कूल का दरवाजा तोड़ उठाकर ले गए भालू, 11 साल के मासूम ने मौत को कैसे दिया चकमा?

Dec 23, 2025 09:47 am ISTGaurav Kala चमोली
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चमोली जिले के पोखरी स्थित हाईस्कूल में भालू के हमले की घटना रौंगटे खड़े कर देने वाली है। दो भालू स्कूल में घुसकर बच्चे को उठा ले जाते हैं। 11 साल के मासूम ने मौत को कैसे मात दी? उसने खुद बताया।

स्कूल का दरवाजा तोड़ उठाकर ले गए भालू, 11 साल के मासूम ने मौत को कैसे दिया चकमा?

मैं अंदर से बाहर को आ रहा था तभी भालू ने पीछे से हमला कर दिया। मैंने पीछे देखा और किसी तरह उसके चुंगल से निकलकर मैं आगे को दौड़ा तो आगे एक और भालू हाथ फैलाए खड़ा था। उसने मुझे दबोच लिया और जंगल की तरफ भागने लगा। लेकिन मैं अचानक झाड़ियों में फंस गया और भालू जंगल की तरफ भाग गया। ये रोंगटे खड़े करने वाली घटना सोमवार को उत्तराखंड के चमोली जिले में पोखरी स्थित हरिशंकर जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले 11 साल के आरव ने सुनाई।

ये बातें बताते वक्त आरव के चेहरे पर किसी तरह का भय नहीं था। मासूम आरव को पता नहीं था कि वह मौत के मुंह से बचकर लौटा है और उसे दूसरा जीवन मिला है। आपबीती सुनाते हुए आरव अपनी कमर में आए जख्म, हाथ में लगी चोटें दिखा रहा था। आरव के चेहरे में आंसू नहीं थे लेकिन साथ के बच्चे इस खौफनाक मंजर से उबरने के बावजूद बीती को लेकर खासे दहशत में थे। हरिशंकर की ग्राम प्रधान रिंकी चौधरी ने छात्रों पर हुए हमले को लेकर वन विभाग से उन्हें मारने की मांग की है। क्षेत्र में भालूओं की यह दूसरी घटना है।

बच्चे तीस मिनट पहले ही पहुंच गए थे स्कूल

हरिशंकर गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में शनिवार को भालू के हमले का प्रयास के बाद शिक्षकों ने स्कूल खुलने का समय सुबह 10 बजे निर्धारित किया था। शिक्षक उपेन्द्र सती ने बताया सोमवार को बच्चें 9.30 बजे ही स्कूल पहुंच गए थे। शिक्षक भी तय समय के अनुसार ही स्कूल के लिए घरों से निकले थे।

आरव को बचाना था बस

आरव को बचाने के लिए दिव्या भालू के पीछे दौड़ी। दिव्या का कहना है कि जैसे ही भालू ने आरव को उठाया उस दौरान उसने केवल आरव को ्चाने की सोची और भालू के पीछे शोर मचाते हुए दौड़ पड़ी। कुछ दूरी पर भालू ने आरव को झाड़ियों में फैंका और भाग गया।

स्कूलों के खुलने का समय बदला

उधर, चमोली डीएम गौरव कुमार ने सुरक्षा के दृष्टिगत जिले सभी राजकीय, राजकीय सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों का संचालन प्रातः 10:00 बजे से अपरान्ह 03:00 बजे तक करने के आदेश दिए हैं। आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन प्रातः 10:00 बजे से 01:00 बजे तक होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद के कुछ विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों तक जाने वाले मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं जिला कार्यक्रम और बाल विकास अधिकारी को आंगनबाड़ी केन्द्रो और विद्यालयों के संचालन समय अवधि के लिए सोमवार को जारी आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं।

उत्तरकाशी में कम नहीं हो रही भालू की दहशत

उधर उत्तरकाशी जिले में भालू की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। भटवाड़ी क्षेत्र के कई गांवों में भालू घर की छतों और आंगन में घूम रहे है। अंधेरा होते ही लोग घरों में कैद हो रहे हैं। बीते गुरुवार रात को भालू मल्ला गांव में एक भालू ओर उसके दो बच्चे घर में घुस आए और भोजन की तलाश में आंगन में घूमते रहे। भालुओं के लगातार हमलों के बाद आमजन को सुरक्षा देने में नाकाम वन विभाग के खिलाफ लोगो का आक्रोश बढ़ता जाती। जिले में भालू के हमले से अब तक 14 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें दो लोगों की मौत हो चुकी है।

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