
आपदा प्रभावित गांव मंदारा में नहीं हुए सुरक्षा के कार्य
भिलंगना ब्लॉक के मांदरा गांव के ग्रामीण पिछले दो वर्षों से भूस्खलन के खतरे में जी रहे हैं। प्रशासन द्वारा मरम्मत और सुरक्षा कार्य की केवल औपचारिकता हो रही है। पिछले वर्ष भारी भूस्खलन के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल मदद की अपील की है।
भिलंगना ब्लॉक की बासर पट्टी के मांदरा गांव के ग्रामीण भय में जीने को मजबूर बने हुए हैं। लगातार दो वर्षों से गांव में भूस्खलन और आपदा का खतरा बना हुआ है। लेकिन शासन-प्रशासन पुनर्निर्माण और सुरक्षात्मक कार्य कराने को तैयार नहीं है। जिससे भविष्य में बड़ी दुर्घटना हो सकती है। मांदरा गांव की प्रधान सुचिता देवी,पूर्व प्रधान मोहन लाल भट्ट ने बताया कि गांव में लगातार दो साल से भूस्खलन हो रहा है। लेकिन प्रशासन की ओर से सिर्फ मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्य के नाम पर औपचारिकता की जा रही हैं। आपदा के बाद टीम गांव में तो भेज दी जाती है, लेकिन न तो कोई ठोस कार्रवाई होती है और न ही समस्या का स्थाई समाधान होता है।

बताया कि पिछले वर्ष गांव के ठीक ऊपर भारी भूस्खलन हुआ था। भूगर्भीय सर्वेक्षण के बाद ग्रामीण निर्माण विभाग ने 8.67 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर भेजा था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी कोई स्वीकृति नहीं मिली। वहीं इस वर्ष भी गांव के बीचो बीच आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे कई हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जबकि दो पेयजल लाइनें, दो परिवारों के शौचालय ध्वस्त, एक गौशाला को भी नुकसान पहुंचा है। इस बार भी मरम्मत कार्य का 14.28 लाख रुपये और 8.67 लाख का नया इस्टीमेट आपदा के तहत भेजा गया है। लेकिन इस ओर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। बताया कि गांव के नीचे भी लगातार भूस्खलन हो रहा है। जिससे हालात और भयावह होते जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन गहरी नींद में सोया है। गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल जनहित में ट्रीटमेंट कार्य करने की अपील की है।

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