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बेटी से दुराचार पर पिता को आजीवन कारावास

जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने कीर्तिनगर क्षेत्र के एक गांव में अपनी नाबालिग लड़की का शारीरिक शोषण के आरोप में पिता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनायी है। फैसला सुनाने के साथ न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। पिछले वर्ष 2017 में कीर्तिनगर क्षेत्र के एक गांव में अपनी नाबालिग लड़की का शोषण करने के आरोपी पिता के मामले में मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। विशेष लोक अभियोजक चंद्रवीर नेगी ने बताया कि बीते 4 सितंबर 2017 को कीर्तिनगर क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग लड़की ने एसडीएम कीर्तिनगर को तहरीर देते हुए अपने पिता पर तीन से चार वर्षों से शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद बाल कल्याण समिति ने नाबालिग पीड़िता का जिला अस्पताल टिहरी और देहरादून में मेडिकल कराया था। मेडिकल में दुराचार की पुष्टि होने पर आरोपी पिता के खिलाफ भादंस की धारा 376-2 एन व पोक्सो अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के अलावा मामले से जुड़े साक्ष्य पेश किए गए। जिसके आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पिता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दोषी को दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। विशेष अभियोजन चंद्रवीर नेगी ने बताया कि मामले में सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा सामान्य आजीवन कारावास की सजा से अलग है। इसमें जब तक दोषी की मृत्यु नहीं हो जाती तब तक उसे जेल में सजा भुगतनी होगी।

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  • Web Title:father imprisionment on rape