नई टिहरी में कांग्रेस का मनरेगा में बदलाव के विरोध में धरना
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ धरना दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महापुरुषों के नामों को मिटाना चाहती है। मनरेगा योजना ग्रामीण लोगों के लिए आजीविका का स्रोत है। नई बिल में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी में बदलाव से राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कार्यकर्ताओं ने योजना में बदलाव न करने की मांग की।
केंद्र सरकार के द्वारा मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के देश के महापुरुषों के नाम को मिटाना चाहती है। कहा कि 2005 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना शुरू की थी। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आजीविका चल रही थी। लेकिन अब सरकार इसको बदल रही है। बुधवार को बौराड़ी में कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खंडवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। कहा कि आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर संचालित मनरेगा को भाजपा सरकार बदलकर उसमें कड़े प्राविधान कर रहे हैं।

जिससे लोगों को रोजगार आसानी से नहीं मिल पाएगा। कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की मजबूत आधार है। कोरोना संकट काल में मनरेगा ही लोगों के जीवन जीना का आधार बनी है। बावजूद अब इसको समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि मनरेगा केंद्र का अंशदान 90 फीसदी और राज्य सरकार का 10 प्रतिशत था। अब नए बिल में इसे घटाकर 60,40 की हिस्सेदारी कर दी है। इससे राज्यों पर भी अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा। उन्होंने योजना में बदलाव न करने की मांग की। इस मौके पर शहर अध्यक्ष कुलदीप पंवार,नरेंद्र चंद रमोला,आशा रावत,सीमा कृषाली, शक्ति जोशी,देवेंद्र नौडियाल,लखबीर सिंह चौहान,श्यामलाल शाह,मनीष पंत,विश्वजीत नेगी,संतोष आर्य,वीरेंद्र दत्त,शोभन कुमाईं,रोशन नौटियाल,किशोर मंद्रवाल,रमेश पेटवाल,शंभू भंडारी,गबर रावत,राकेश कुमार,ममता उनियाल,अनीता देवी आदि मौजूद थे।

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