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सवाल : हादसा हुआ तो क्या जेल जाएंगे इंजीनियर

आईएसबीटी वाईशेप फ्लाईओवर का विवाद बढ़ता जा रहा है। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि कैसे आईआईटी जैसे संस्थान से फ्लाईओवर का डिजाइन पास हो गया। कैसे विभाग के अफसर खामी पकड़ने में चूक गए। सरकार के बड़े अफसरों ने भी इसे मंजूरी दे दी। सवाल उठता है कि अगर फ्लाईओवर पर हादसा होता है तो क्या डिजाइन बनाने वाले और निर्माण में शामिल इंजीनियर जेल जाएंगे। आईएसबीटी वाईशेप फ्लाईओवर का डिजाइन आईआईटी मुंबई समेत चार कंसल्टेंट एजेंसियों की देखरेख में तैयार कराया गया। आईएसबीटी वाईशेप फ्लाईओवर उद्घाटन के दिन से ही विवादों में है। फ्लाईओवर के डिजाइन पर सवाल उठने के बाद सरकार ने इस मामले में जांच बैठाई है।

ऐसे में अब इस फ्लाईओवर का डिजाइन तैयार करने वाली एजेंसियों की क्षमता पर भी सवाल खड़ा हो गया है। फ्लाईओवर का निर्माण पूरा हुआ तो फिर रिस्पना पुल की तरफ से रुड़की-सहारनपुर की ओर जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए वाईशेप की मांग उठी। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि वाईशेप के लिए लोनिवि ने मैसर्स स्ट्रेंथ इंजीनियरिंग जयपुर और डिजाइन टेक स्ट्रैक्चरल कंसल्टेंट देहरादून को डिजाइन का काम सौंपा। डिजाइन का एमएनआईटी जयपुर और आईआईटी मुंबई से परीक्षण कराया। वहां से मंजूरी किे बाद विभाग ने डीपीआर तैयार की और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वित्त व्यय समिति की बैठक में 33 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी। आखिर विभाग और सरकार के अफसरों ने तब क्यों इस पर सवाल नहीं उठाए कि फोरलेन फ्लाईओवर संग वाईशेप कैसे जुड़ेगा। 


गैरइरादतन हत्या का दर्ज हो सकता है केस
अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल का कहना है कि हादसे में अगर किसी की मौत होती है तो डिजाइन करने वाले इंजीनियर, अफसर और शासन के संबंधित आला अधिकारी के खिलाफ धारा 304 ए के तहत गैर इरादतन हत्या में मुकदमा दर्ज हो सकता है


वाईशेप ने मुख्य फ्लाईओवर का ‘शेप’ भी बिगाड़ा
विवादों में घिरे आईएसबीटी वाईशेप फ्लाईओवर के कारण फोरलेन मुख्य फ्लाईओवर की शेफ (बनावट) भी बिगड़ गई है। जिस फ्लाईओवर पर वाहन सरपट निकल रहे थे, उसपर बोटलनेक बन चुका है। वाईशेप के ज्वाइंट वाली जगह हादसों को न्यौता दे रही है। आईएसबीटी वाईशेप फ्लाईओवर की इंजीनियरिंग ने एक बार फिर से लोनिवि एनएच को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बल्लीवाला फ्लाईओवर के बाद वाईशेप फ्लाईओवर पर विभाग की फजीहत हो रही है। वन-वे फ्लाईओवर जब आईएसबीटी मुख्य फ्लाईओवर में जाकर मिलता है तो वहां पर खतरनाक प्वाइंट बन गया है। एक तरह से बोटलनेक बन गया है। वाईशेप के कारण मुख्य फ्लाईओवर पर चलने वाला ट्रैफिक भी गड़बड़ाने लगा है। फ्लाईओवर बनाने का मकसद था सरपट वाहन निकल सकें, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। डिजाइन तैयार करने वाली कंपनियों तो सवालों के घेरे में हैं ही, एनएच रुड़की खंड के अफसरों भी भविष्य में होने वाली दिक्कत को समझ नहीं पाए। उस वक्त अधिशासी अभियंता शैलेंद्र मिश्रा, अपर सहायक अभियंता अखिलेश कुमार, अवर अभियंता पुष्कर सिंह नेगी रहे। डिजाइन की खामियों को दूर करने के लिए आईएसबीटी और वाईशेप फ्लाईओवर में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए पाइप लगाए गए हैं। फ्लाईओवर में बायीं तरफ जाना प्रतिबंधित है और ओवरटेक न करें जैसे साइनबोर्ड तो लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद मुसीबत दूर नहीं हुई है। 

बल्लीवाला में भी हो चुकी है यही गलती 
बल्लीवाला फ्लाईओवर के मामले में भी सरकार पहले यह गलती कर चुकी है। फोरलेन फ्लाईओवर को सरकार ने पहले टू लेन में बदला और बाद में उसका भी डिजाइन गलत निकल गया। 12 से अधिक लोग बल्लीवाला फ्लाईओवर पर अभी तक जान गवां चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया में कोई सुधार नहीं हो रहा है। 

आईएसबीटी फ्लाईओवर में प्रतिबंध के बावजूद दुपहिया वाहन चालक गलत दिशा में गुजर रहे हैं। फोटो: हिन्दुस्तान 
 

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