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उत्तराखंड UCC में जनजातियों को क्यों अलग रखा गया? जानिए क्या है पूरा मामला

यूसीसी में शामिल करने को संविधान में संशोधन जरूरी है। इस कारण जनजातियों और आदिवासियों को यूसीसी के बाहर रखा गया है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति क्षेत्रों का दौरा किया।

उत्तराखंड UCC में जनजातियों को क्यों अलग रखा गया? जानिए क्या है पूरा मामला
Himanshu Kumar Lallदेहरादून। संतोष चमोलीWed, 07 Feb 2024 11:53 AM
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उत्तराखंड में जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखने की बड़ी वजह उनकी अलग सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान है। भाषा,रीति-रिवाज,पहनावा, खान-पान, संस्कृति उन्हें विशिष्ट बनाती है। विधानसभा में पेश यूसीसी विधेयक में जनजातियों-आदिवासियों को बाहर रखने के प्रश्न पर कहा गया कि संविधान में जनजातियों को विशेष संरक्षण प्राप्त है।

इन्हें यूसीसी में शामिल करने को संविधान में संशोधन जरूरी है। इस कारण जनजातियों और आदिवासियों को यूसीसी के बाहर रखा गया है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति ने विभिन्न जनजाति क्षेत्रों का दौरा कर जनसंवाद किया था। इस दौरान जो सुझाव मिले, उनमें स्पष्ट था कि जनजातीय समुदाय भी अपने यहां व्याप्त कुरीतियां समाप्त करने का पक्षधर है, पर जनजातीय समाज के लोगों की यह स्पष्ट धारणा रही कि समाज के विभिन्न वर्गों में आपसी विचार-विमर्श तथा सहमति के लिए कुछ अधिक समय की जरूरत है। 

पूर्व कुलपति डॉ.यूएस रावत ने कहा कि चमोली की भोटिया जनजाति के अपने रीति रिवाज, सांस्कृतिक मान्यताएं और धार्मिक विधि-विधान हैं। बाकी समाज से इनका अंतर भाषाई, पहनावा, धार्मिक विधि-विधान व लोक संस्कृति को लेकर है। अगर ये जनजाति यूसीसी के दायरे में आती भी तो खास अंतर नहीं आता, क्योंकि इन लोगों के पास शेष सामाजिक अधिकार सामान्य समाज की तरह हैं। 

जौनसारी समाज को बाहर रखना सही कदम  
लोक पंचायत जौनसार बावर के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्रीचंद शर्मा के मुताबिक अगर अभी की परिस्थिति में जनजातियों को यूसीसी के दायरे में लाया जाता तो कहीं न कहीं क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाओं पर यह अतिक्रमण होता। जनजाति क्षेत्र के अपने हक-हकूक हैं और इन पर कोई असर न पड़े, इसीलिए यूसीसी के दायरे से बाहर रखना जरूरी था। जो कुछ कुरीतियां हैं, उन्हें दूर करने के प्रयास हो रहे हैं। समाज जब इसके लिए तैयार हो जाएगा तो फिर इससे कानून के जरिए अनुपालन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
 

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