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Hindi News उत्तराखंडभीषण गर्मी से क्यों तप रहे हैं उत्तराखंड के पहाड़ और मैदान? मौसम एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

भीषण गर्मी से क्यों तप रहे हैं उत्तराखंड के पहाड़ और मैदान? मौसम एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

मौसम निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह के मुताबिक, सामान्य से 4.5 डिग्री ज्यादा तापमान होने पर लू की स्थिति बनती है। सामान्यत मई-जून में तीन से चार बार तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाता था,लेकिन इस बार बढ़ा है।

भीषण गर्मी से क्यों तप रहे हैं उत्तराखंड के पहाड़ और मैदान? मौसम एक्सपर्ट ने बताई असली वजह
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, चांद मोहम्मदSun, 16 Jun 2024 10:49 AM
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उत्तराखंड इस बार भीषण गर्मी की चपेट में है। हैरत की बात है कि देहरादन, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश में बीते 30 दिनों में 20 दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर रहा। मौसम निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह के मुताबिक, साइक्लोन से बदले पैटर्न की वजह से उत्तराखंड में बेहद गर्म हवाएं चल रही हैं।  

मौसम विभाग के पिछले दस साल के आकलन में हर वर्ष महज तीन से चार दिन ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, दून में 17 से 31 मई के बीच तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रहा और एक जून से 15 जून तक दस बार इतना गर्म रहा।

मौसम निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह के मुताबिक, सामान्य से 4.5 डिग्री ज्यादा तापमान होने पर लू की स्थिति बनती है। सामान्यत मई-जून में तीन से चार बार तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाता था, इस बार दून में एक माह में 20 दिन ऐसी स्थिति रही।

इस बार गर्मी के कई रिकॉर्ड टूटे। 31 मई को 43.3 डिग्री तापमान पहुंचा, जो मई का ऑल टाइम रिकार्ड बना। जून महीने में 14 तारीख को तापमान 43 डिग्री तक पहुंचा। ऐसे में लोगों का भीषण गर्मी से बुरा हाल हो गया है।

ऐसे रखें ख्याल 
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार, बेहताशा गर्मी से पेट, डिहाईड्रेशन, स्किन और आंखों की समस्या हो रही है। जब लू चले तो बाहर न निकलें। शरीर में पानी की कमी नहीं हो। खूब पानी पिएं।

उत्तराखंड में तापमान बढ़ने की यह वजह बताई गई
मौसम निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह के मुताबिक, साइक्लोन से बदले पैटर्न की वजह से उत्तराखंड में बेहद गर्म हवाएं चल रही हैं। बारिश नहीं हुई है। ऐसे में तापमान बढ़ रहा है। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल कहते हैं कि पेड़ों के कटान, अनियोजित विकास से यह स्थिति पैदा हुई है। पेड़ों के कटान पर रोक लगे, पौधरोपण को जन आंदोलन बनाएं। उनकी निगरानी को सख्त पॉलिसी बनाई जाए। अन्यथा आने वाले दिन और चिंताजनक होंगे।

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