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120 घंटे बीते; सुरंग से मजदूरों को निकालने में और कितना लग सकता है वक्त?

टनल में विगत रविवार से फंसे लोगों की जान बचान को ऑक्सीजन सप्लाई के साथ खाद्य पदार्थ भी भेजा जा रहा है। उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल में 100 घंटे से ज्यादा वक्त से फंसे लोगों के लिए रेस्कयू जारी है।

120 घंटे बीते; सुरंग से मजदूरों को निकालने में और कितना लग सकता है वक्त?
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तान टीमFri, 17 Nov 2023 09:59 AM
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उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल में 100 घंटे से ज्यादा वक्त से फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए नई ऑगर मशीन ने काम शुरू कर दिया। देर रात तक टनल में 900 मिलीमीटर व्यास के छह-छह मीटर के तीन पाइपों को 18 मीटर तक बिछा दिया गया था।

रात साढ़े बारह बजे चौथे पाइप को जोड़ने का कार्य शुरू हो गया था। टनल में कुल 60 मीटर तक ऐसे 11 पाइप बिछाए जाने हैं। इन्हीं पाइप से रास्ता बनाते हुए मजदूरों को बाहर लाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि देर रात तक मजूदरों को बाहर निकाल लिया जाएगा।

टनल में विगत रविवार से फंसे लोगों की जान बचान को ऑक्सीजन सप्लाई के साथ खाद्य पदार्थ भी भेजा जा रहा है। रेस्क्यू टीम द्वारा टनल में फंसे लोगों की उनके परिजनों से भी फोन पर बात करवाई गई है। दूसरी ओर, रेस्क्यू  टीमों द्वारा लगातार संपर्क बनाते हुए लोगों का हौसला भी बढ़ाया जा रहा है। 

100 घंटे से ज्यादा हो गए मजदूरों को फंसे हुए
रविवार सुबह 5.30 बजे भूस्खलन की वजह से आए मलबे के कारण सिलक्यारा टनल बंद हो गई थी। उस वक्त उसमें 40 मजदूर मौजूद थे। यह स्थान सिलक्यारा की ओर से बनाई जा रही टनल के 270 मीटर भीतर है। आज पांचवें दिन शाम तक मजदूरों को टनल में फंसे 100 घंटे से ज्यादा वक्त बीत चुका है।

दो से ढाई घंटे लग रहे एक पाइप को आगे बढ़ाने में
उत्तरकाशी, संवाददाता। टनल के भीतर पाइप बिछाने का काम कम चुनौती भरा नहीं है। ऑगर मशीन एक छह मीटर लंबे पाइप को टनल में मलबे के भीतर पुश करती है। इसका पांच मीटर भाग जब आगे फिक्स हो जाता है, इसके तत्काल बाद बाद बचे एक मीटर हिस्से के साथ दूसरे छह मीटर लंबे पाइप को जोड़ने का काम शुरू कर दिया जाता है।

वेल्डिंग से पाइप को जोड़ने के बाद फिर इंतजार करना होता है इसके ठंडा होने का। एक वरिष्ठ इंजीनियर बताते हैं कि गरम पाइप को भीतर धकेलने पर वह टूट भी सकता है। ठंडा होने पर ही दोनों हिस्सों में मजबूती आ जाती है। इस प्रक्रिया में दो से ढाई घंटे का वक्त लगता है।

इंटरनेशनल टनल ऑर्गेनाइजेशन की सलाह पर लगाई नई मशीन सिलक्यारा टनल में नई मशीन के जरिए ड्रिलिंग इंटनरेशनल टनल ऑर्गेनाइजेशन की सलाह पर की जा रही है। इस घटना से जुड़े रिकार्ड और डेटा ऑर्गेनाइजेशन के एचओडी को भेजे गए थे।

इसके अध्ययन के बाद जो सर्वश्रेष्ठ विकल्प उन्होंने बताया, उसी के अनुसार सरकार आगे बढ़ रही है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि हालांकि पहले भी ऑगर मशीन लगाई गई थी, लेकिन उसमें कुछ तकनीकि समस्या आ गई। नई मशीन अधिक शक्तिशाली और तेज भी है। अब तक दो पाइप लगाए जा चुके हैं।

4 इंच का पाइप ही जीवन रेखा
टनल में फंसे मजदूरों के लिए चार इंच का एक पाइप जीवन रेखा का काम कर रहा है। इस पाइप के जरिए ही मजदूरों की बाहर अपने परिजनों और रेस्क्यू टीम के साथ बातचीत हो रही है। इसी के जरिए भीतर खाद्य सामग्री, दवाएं और ऑक्सीजन भी भेजी जा रही है।

दो से तीन दिन में पूरा हो जाएगा रेस्क्यू: सिंह
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह (सेनि) ने कहा कि टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर लाने के लिए बेहतर से बेहतर विकल्पों पर काम किया जा रहा है। रेस्क्यू अभियान को पूरा करने के लिए दो से तीन दिन का वक्त रखा गया है।

यदि स्थितियां अनुकूल हुई तो यह समय कुछ कम भी हो सकता है। नई मशीन से शुरू की गई ड्रिलिंग अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टनल विशेषज्ञों की सलाह से ही शुरू की गई है। वर्तमान में सरकार को एकमात्र लक्ष्य सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर लाना है। उसके बाद भूस्खलन का कारण और सुरक्षा से संबंधित अन्य विषयों की गहराई से जांच की जाएगी।

उम्मीद 10 दिन बाद निकाले थे मजदूर
देहरादून। नई ऑगर मशीन के सफलतापूर्व ड्रिलिंग शुरू करने से सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों के लिए शुभ संकेत है। यदि काम सुचारू चलता रहा तो कल देर रात तक उनके बाहर निकल आने की उम्मीद है।

सितंबर 2015 में हिमचाल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं पनौल सुरंग में फंसे श्रमिकों को देखें तो वहां निर्माणाधीन सुरंग में करीब 3 श्रमिक फंस गए थे। जिन्हें एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से करीब 10 दिन बाद सुरंग से सुरक्षित निकाला गया था। यहां भी सुरंग को ड्रिल कर फंसे हुए श्रमिकों को एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाले थे।

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