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उत्तरकाशी टनल हादसे की क्या है असली वजह और 41 लोगों की फंसकर क्यों आफत में जान?

उत्तरकाशी टनल हादसे की क्या है असली वजह और 41 लोगों की फंसकर क्यों आफत में जान क्यों है? उत्तरकाशी टनल हादसे को केंद्र सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। सरकार का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

उत्तरकाशी टनल हादसे की क्या है असली वजह और 41 लोगों की फंसकर क्यों आफत में जान?
Himanshu Kumar Lallउत्तरकाशी। सुरेंद्र नौटियालMon, 20 Nov 2023 01:32 PM
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उत्तरकाशी टनल हादसे को केंद्र सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। केंद्रीय परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने स्पष्ट कहा कि यह अप्रत्याशित घटना है। इसके कारण तलाशने के लिए जांच कराई जाएगी।

सिलक्यारा में मीडिया कर्मियों से बातचीत में गडकरी ने कहा कि इसके लिए इंक्वायरी कमेटी का गठन किया जाएगा। राज्य सरकार ने जांच समिति का गठन किया है।

इस घटना की सभी पहलुओं को बारीकी से जांच की जाएगी। विशेषज्ञ जांच के बाद ही इस घटना पर कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है। उन्होंने अनुरोध किया कि जांच रिपेार्ट आने से पहले किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए।

हिमालयी क्षेत्र में बन रही हैं कई टनल
उत्तराखंड के साथ साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में इस वक्त पौने तीन लाख करोड़ रुपये की लागत की टनल बनाई जा रही हैं। यह टनल विभिन्न रेल, सड़क प्रोजेक्ट में बन रही हैं। गडकरी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना काफी जटिल है। जहां महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में पहाड़ का मतलब ठोस चट़्टान होता है।

यहां पहाड़ अलग प्रकार है। इसलिए यहां एहतियात बरता जाता है। हिमालयी क्षेत्रों में बन रहे प्रोजेक्ट में भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जा रहे हैं।

हादसे के बाद सिलक्यारा टनल पर सवाल
हादसे के बाद सिलक्यारा टनल पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जियोफिजिकल जांच में शेयर जोन सामने आने के बाद भी पर्याप्त सावधानियां नहीं बरती गई। इसी का नतीजा है कि टनल निर्माण के दौरान ही धंस गई और अब 41 लोगों की जान कई दिनों से फंसी हुई है।

भूगर्भ विशेषज्ञ और गढ़वाल विवि में प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट बताते हैं कि सिलक्यारा टनल जिस स्थान पर बनी हुई है वहां से होकर एक शेयर जोन गुजरता है। शेयर जोन एक तरह से चट्टान के चूरे वाले क्षेत्र को कहा जाता है जो खासा कमजोर होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि शेयर जोन में भी काम किया जा सकता है।

लेकिन टनल के निर्माण से पहले या तो शेयर जोन को निकाला जाना चाहिए था या फिर उसका एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए था। शेयर जोन में टनल के निर्माण से उसके धंसने जैसी स्थिति पैदा हुई और इससे सुरक्षा संबंधी खतरा भी बनता है। भूगर्भ विज्ञान के ही विशेषज्ञ डॉ एसपी सती ने भी परियोजना निर्माण के दौरान मानकों के पालन पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि जब टनल निर्माण से पहले ही शेयर जोन का पता था तो सावधानी बरते जाने की जरूरत थी। उन्होंने बताया कि ऐसा लगता है कि शेयर जोन से आगे तक टनल बन चुकी थी। लेकिन आगे की टनल बनाने के समय विस्फोटकों के प्रयोग से ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि टनल धंसने की वजह विस्फोटक का प्रयोग हो सकता है।

उन्होंने कहा कि हिमायल एक कमजोर पहाड़ है ऐसे में यहां पर निर्माण के दौरान हमेशा सावधानी की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि जब हम टनल जैसी परियोजना पर काम करते हैं तो उसके लिए मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाना बेहद जरूरी है।

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