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Hindi News उत्तराखंडसूखने की कगार पर उत्तराखंड के 477 जल स्रोत, जल संस्थान की रिपोर्ट ने डराया; क्या बताए कारण

सूखने की कगार पर उत्तराखंड के 477 जल स्रोत, जल संस्थान की रिपोर्ट ने डराया; क्या बताए कारण

उत्तराखंड में 477 जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं। जल संस्थान की यह लेटेस्ट रिपोर्ट चिंताजनक है। उत्तराखंड में भीषण गर्मी और कम बारिश से नदियों का पानी घट रहा है। पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।

सूखने की कगार पर उत्तराखंड के 477 जल स्रोत, जल संस्थान की रिपोर्ट ने डराया; क्या बताए कारण
Sneha Baluniयोगेश जोशी ‘योगी’,चम्पावतThu, 13 Jun 2024 09:32 AM
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देश के बड़े हिस्से के लिए जीनवदायिनी गंगा-यमुना के उद्गम वाले प्रदेश उत्तराखंड में 477 जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं। जल संस्थान की यह ताजा रिपोर्ट चिंताजनक है। उत्तराखंड में भीषण गर्मी और कम बारिश से नदियों का पानी घट रहा है। हल्द्वानी में गौला व रामनगर-अल्मोड़ा में कोसी नदी का जलस्तर गिरने से पीने के पानी और सिंचाई का संकट हो गया है। तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियरों के पिघलने से अभी गंगा-यमुना के जल स्तर में कमी नहीं है, लेकिन इन पर दूरगामी असर पड़ेगा। हजारों स्रोत ग्लेशियरों से रीचार्ज होते हैं, भविष्य में उनके सूख जाने का खतरा नजर आने लगा है। नैनीताल झील का जलस्तर चिंताजनक रूप से कम हुआ है। बारिश की कमी और जंगलों में बढ़ती आग के कारण प्रदेश में यह संकट उपजा है। पहाड़ों पर कई जगह लोगों को भारी जल किल्लत से जूझना पड़ा रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार,उत्तराखंड में इस बार अप्रैल में सामान्य से 84 और मई में 21 कम बारिश हुई। जून में भी अब तक हालात सूखे जैसे हैं। जल संस्थान की मानें तो इससे प्रदेश में 477 पेयजल स्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुमाऊं में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ और गढ़वाल में पौड़ी-चमोली पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। जंगलों में आग से भी जलस्रोतों को नुकसान पहुंचा है।

पानी के 288 स्रोत गंभीर संकट में

उत्तराखंड में जो 477 पेयजल स्रोत प्रभावित हुए हैं। उनमें से 288 स्रोत ऐसे हैं जिनका पानी 50 प्रतिशत से अधिक सूख चुका है। इसमें भी 47 स्रोतों में पानी 75 प्रतिशत से भी कम रह गया है। 75 फीसदी से अधिक सूख चुके स्रोतों के बचाव को जल्द ठोस उपाय नहीं किए गए तो इनका अस्तित्व खत्म हो सकता है। साथ ही 189 स्रोत ऐसे हैं जो 50 प्रतिशत तक प्रभावित हुए हैं। हल्द्वानी की जीवनधारा गौला नदी 26 साल बाद जून में अपने न्यूतम स्तर पर है। 1998 के बाद पहली बार गौला का जलस्तर 50 क्यूसेक पर पहुंचा है। भीषण गर्मी से हर दिन औसतन दो क्यूसेक पानी कम हो रहा है।

ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार बढ़ी

वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ.मनीष मेहता के मुताबिक, बारिश के पैटर्न में बदलाव की वजह से जलस्रोत और खेतीबाड़ी तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। उच्च हिमालय के निचले हिस्सों में बर्फबारी में कमी से हिमालयी नदियों पर भी संकट है। मानवीय हस्तक्षेप से हालात ज्यादा बिगड़ रहे हैं। जंगलों के कटान, खनन, अनियोजित विकास कार्यों का असर पूरी प्रकृति पर पड़ रहा है।

उत्तराखंड जल संस्थान की मुख्य महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग ने कहा, 'गर्मी के प्रभाव से उत्तराखंड में जलस्रोत सूखने के साथ ही पानी का स्तर भी कम हो रहा है। इसका असर नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है।'