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Hindi News उत्तराखंडपहाड़ों से लेकर मैदानों तक गर्मी में जलसंकट, भूजल बचाने के लिए बना सख्त ऐक्शन प्लान

पहाड़ों से लेकर मैदानों तक गर्मी में जलसंकट, भूजल बचाने के लिए बना सख्त ऐक्शन प्लान

इस बीच, भूजल के अंधाधुंध दोहन से जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार घट रहा है। इससे कई जगह ट्यूबवेल सूख रहे हैं। तमाम स्थानों पर ट्यूबवेल के पाइप बढ़ाने पड़ रहे हैं। ऐक्शन प्लान बनाया गया है।

पहाड़ों से लेकर मैदानों तक गर्मी में जलसंकट, भूजल बचाने के लिए बना सख्त ऐक्शन प्लान
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, रवि बीएस नेगीMon, 17 Jun 2024 10:44 AM
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उत्तराखंड में घटते भूजल को बचाने के लिए प्राइवेट बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अब जल संस्थान की मंजूरी लिए बिना घर, अपार्टमेंट,होटल,हॉस्पिटल,स्कूल में हैंडपंप, सबमर्सिबल और टॺूबवेल के लिए निजी बोरिंग नहीं कराई जा सकेगी।

नियम तोड़ने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। खेती के लिए ट्यूबवेल लगाने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उत्तराखंड में सितंबर 2023 से अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस बार गर्मियों में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया। शहर-गांव, पहाड़-मैदान, हर जगह लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

इस बीच, भूजल के अंधाधुंध दोहन से जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार घट रहा है। इससे कई जगह ट्यूबवेल सूख रहे हैं। तमाम स्थानों पर ट्यूबवेल के पाइप बढ़ाने पड़ रहे हैं। भविष्य में ये संकट और न गहराए, इसके लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

जल संस्थान ने साफ किया है कि अब बिना अनुमति के निजी बोरिंग नहीं कराए जा सकेंगे। यदि किसी को जरूरत है,तो इसके लिए आवेदन करना होगा। जिस क्षेत्र में बोरिंग को आवेदन किया जाएगा,वहां पहले भूजल स्तर की जांच होगी।

भूजल की स्थिति और आवेदक की जरूरत के आकलन के बाद जरूरी होने पर बोरिंग की मंजूरी मिलेगी। इस संबंध में महाप्रबंधक मुख्यालय डीके सिंह ने तीन दिन पूर्व आदेश जारी कर दिए। सिंह ने बताया कि सभी शाखाओं को इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य गठन के करीब 24 वर्ष बाद जल संस्थान को आई ऐक्ट की याद
संस्थान को जल संस्थान (संग्रह, संचय तथा वितरण) अधिनियम-1975 की धारा छह लागू करने की याद आई। अब तक जल संस्थान के अफसर यही दोहराते रहे कि उनके पास सख्त कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है।

25 हजार से अधिक निजी बोरिंग 
प्रदेश में प्रतिवर्ष 25 हजार से अधिक निजी बोरिंग होती हैं। इसमें निजी घरों से लेकर हर तरह के संस्थान शामिल हैं। हर साल निजी बोरिंग की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। जलसंकट को देखते हुए अब हर दूसरे घर में भी पानी की बोरिंग कराई जा रही है।


 

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