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वीवीआईपी नंबरों की फीस 10 गुना बढ़ी

सरकार ने वीवीआईपी वाहनों के नंबरों के शुल्क में दस फीसदी का इजाफा कर दिया है। अब 0001 और 0786 नंबर के लिए एक लाख रुपये से ऑनलाइन नीलामी होगी। कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान नियमावली में संशोधन किया है। अभी इन नंबरों के लिए दस हजार रुपये शुल्क की व्यवस्था थी। इन नंबरों को स्टेटस सिंबल माना जाता है और नंबर लेने के लिए होड़ रहती है। हालांकि, ऑनलाइन बोली में कई बार ये नंबर चार से पांच लाख रुपये में तक छूटे हैं। नई कार का तकनीकी परीक्षण नहीं होगा: शोरूम से कार लेने पर आरटीओ दफ्तर में तकनीकी परीक्षण नहीं होगा। दस्तावेजों से ही विभागीय कर्मियों को इसकी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। तकनीकी परीक्षण के नाम पर शिकायतें आने पर सरकार ने यह कदम उठाया। कर अधिकारी अब लगा सकेंगे स्टार: देहरादून। परिवहन कर अधिकारी द्वितीय अब अपनी वर्दी में कंधों पर तीन स्टार भी लगा सकेंगे। पहले वह सिल्वर कलर के बटन लगाया करते थे। उनकी बांह पर अब उत्तराखंड परिवहन के तय डिजाइन का मोगोग्राम भी होगा। साथ ही जूतों का रंग भूरा होगा।

 

यहां भी वृद्धि
0002 से 0009 और 1111, 2222, 3333, 4444, 5555, 6666, 7777, 8888 और 9999 के नंबरों के लिए न्यूनतम शुल्क 25,000 हजार रुपये कर दिया गया है। पहले इन नंबरों का न्यूनतम शुल्क 10,000 रुपये निर्धारित था।


प्रदूषण सर्टिफिकेट महंगा
वाहन प्रदूषण की जांच के लिए कोई भी अपना केंद्र खोल सकता है। पहले वर्कशाप, पेट्रोल पंप, गैराज, कार्यशाला को ही यह अनुमति थी। अब स्वैच्छिक संस्थाएं और कोई व्यक्ति इसे खोलने के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके अलावा प्रदूषण जांच सर्टिफिकेट के लिए 70 रुपये तय थे। अब 100 रुपये देने होंगे। 

पौराणिक मंदिर और धरोहरों को संवारेगा उद्योग जगत
देहरादून। उद्योग-कॉरपोरेट जगत उत्तराखंड की पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीर्णोद्धार कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र की ‘हमारी धरोहर-हमारी पहचान’ योजना को उत्तराखंड ने भी अपना लिया है। कैबिनेट में ‘विरासत का अंगीकार’ योजना पर मुहर लगाई गई। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि राज्य में कई प्राचीन स्मारक खंडहर हो चुके हैं। पुरातात्विक महत्व के स्थल, मंदिरों को जीर्णोद्धार की जरूरत है। ऐसे में इन धरोहरों के खोए हुए सौंदर्य और गौरव को निजी संस्थाओं की मदद से दोबारा हासिल कर सकेंगे। सांस्कृतिक पर्यटन को विकसित करने की दिशा में ये प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे।


उत्तराखंड की धरोहरों में सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जगी
‘विरासत का अंगीकार’ योजना पर मुहर के बाद उत्तराखंड की धरोहरों में  पीने का पानी, वाईफाई सिस्टम, बिजली, सड़क, कैफेटेरिया, सीसीटीवी कैमरे, साउंड सिस्टम, क्योस्क, स्नानघर और साईनेज जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर के अनुसार, जो भी कंपनी, उद्योग, कॉरपोरेट हाउस आगे आएंगे, उन्हें फॉर्म दिया जाएगा। इन कंपनियों को मंदिरों के आसपास आधारभूत ढांचे को विकसित करने के साथ ही जीर्णोद्धार का भी अधिकार दिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि कॉरपोरेट सेक्टर और उद्योग जगत को हर साल सीएसआर फंड में खर्च करना होता है। ऐसे पौराणिक, ऐतिहासिक धरोहरों  के जीर्णोद्धार में खर्च करने से उन्हें भी पहचान मिलेगी।

 

 

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