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Hindi News उत्तराखंडविधायकों की ताकत के बाद भी मतदान में गिरावट, उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में क्या संदेश?

विधायकों की ताकत के बाद भी मतदान में गिरावट, उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में क्या संदेश?

प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी का असर दिखा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रुद्रपुर में चुनावी सभा की थी। यहां मतदान 61.63 तक पहुंचा है। दिग्गजों का मानना है कि रैली से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा।

विधायकों की ताकत के बाद भी मतदान में गिरावट, उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में क्या संदेश?
Himanshu Kumar Lallहल्द्वानी। जहांगीर राजूSat, 20 Apr 2024 09:53 AM
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उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 में प्रदेश की ही तरह नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट पर भी मतदाताओं का रवैया निराशाजनक रहा। लेकिन 14 की 14 विधानसभा सीटों में एक संदेश साफ था कि यहां भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर है।

तीसरा कोई प्रत्याशी चुनाव प्रभावित करता नजर नहीं आता। साल 2019 की तुलना में गिरे मतदान का फायदा किसको होगा, इसका अनुमान लगाने में राजनीतिक विश्लेषक जुट गए हैं। क्योंकि पिछले चुनाव में यह सीट भाजपा ने सबसे बड़े अंतराल से फतह की थी।

नैनीताल सीट पर भाजपा के सामने जीत की हैट्रिक की चुनौती है, तो कांग्रेस अपने गढ़ में वापसी के लिए छटपटाती नजर आई। तराई में भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने भी खूब जोर लगाया, इसके बावजूद मतदान प्रतिशत गिरना चौंका रहा है।

नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र में इस बार 65.71 मतदान हुआ है। यह 2019 के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम रहा है। यह विस सीट इस समय कांग्रेस के पास है। यही हाल कांग्रेस की दूसरी विस सीट किच्छा का है। यहां 63.90 मतदान हुआ है। पिछले चुनाव में यहां 69.14 फीसदी वोट पड़े थे।

भाजपा के विधायकों वाले विस क्षेत्रों में लालकुआं में 60.10 हुआ है। पिछले चुनाव में यहां 69.51 वोट पड़े थे। भीमताल में 55.89 वोट पड़े हैं जबकि पिछले चुनाव में 59.51 फीसदी वोट पड़े थे। गदरपुर में 67.92 वोट पड़े हैं। पिछली बार यहां 75.78 फीसदी मतदान हुआ था।

दिग्गजों की सीट पर गिरे मतदान से असमंजस भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की सीट पर गिरे मतदान प्रतिशत से असमंजस की स्थिति बन गई है। बाजपुर सीट में 61.47 फीसदी वोट पड़े हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के प्रभाव वाली इस सीट पर 2019 में 72.29 वोट पड़े थे। यहां भी मतदान प्रतिशत नीचे आया है। कालाढूंगी में 60.21 मतदान हुआ है। जबकि पिछली बार 66.82 वोट पड़े थे।

प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी का असर दिखा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रुद्रपुर में चुनावी सभा की थी। यहां मतदान 61.63 तक पहुंचा है। भाजपा के दिग्गजों का मानना है कि प्रधानमंत्री की रैली के चलते यहां वोट प्रतिशत बढ़ा है।

वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रभाव वाली खटीमा विस सीट में 65.03 फीसदी तक मतदान हुआ है। हालांकि पिछले चुनावों में यहां 72.21 वोट पड़े थे। क्षेत्र में इस बार हुए मतदान का श्रेय भाजपा नेता मुख्यमंत्री धामी को देते हैं।

वहीं कांग्रेस नेता रोचक मुकाबले की बात कर रहे हैं। वहीं सितारगंज में 70.15 मतदान हुआ है। हालांकि पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 8 मतदान कम हुआ है । क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा इस चुनाव में पूरे समय क्षेत्र में सक्रियता से जुटे रहे थे।

हल्द्वानी में भी आई भारी गिरावट
हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में मतदान में गिरावट कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन सकता है। यहां पिछले संसदीय चुनाव में 66.22 फीसदी वोट पड़े थे। जबकि इस चुनाव में यहां 57.98 फीसदी वोट पड़े हैं। कांग्रेस के प्रभाव वाली इस सीट पर मतदान गिरने से सत्ता पक्ष को फायदा हो सकता है।

सांख्यिकीय अध्ययन के मुताबिक मतदान प्रतिशत कम होना सत्ता पक्ष से नाराजगी और एंटी इनकंबेंसी है। हर बार देखा गया है कि सत्ता पक्ष से नाराजगी के कारण की मतदान का प्रतिशत गिरता है। 
प्रो. मृगेश पांडे, राजनीतिक विश्लेषक