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पहाड़ के स्कूलों में बच्चों को ‘वर्चुअल क्लास’ से गणित-विज्ञान की तालीम

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, उन स्कूलों में उत्तराखंड टैक्नोलॉजी क्लब से जुड़े शिक्षक वर्चुअल क्लास के माध्यम से...

पहाड़ के स्कूलों में बच्चों को ‘वर्चुअल क्लास’ से गणित-विज्ञान की तालीम
लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून। चांद मोहम्मद Mon, 25 Feb 2019 03:26 PM
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, उन स्कूलों में उत्तराखंड टैक्नोलॉजी क्लब से जुड़े शिक्षक वर्चुअल क्लास के माध्यम से गणित-विज्ञान की तालीम देंगे। ये शिक्षक दिल्ली, मुंबई, जयपुर, देहरादून समेत देश के विभिन्न कोनों से बच्चों को लाइव क्लास से उनका गणित-विज्ञान का कोर्स पूरा कराएंगे।  क्लब की ओर से पौड़ी गढ़वाल के डबरालस्यूं स्थित तिमली विद्यापीठ से यह शुरूआत की गई है। यहां हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी कर रहे राजकीय इंटर कॉलेज देवीखेत के छात्र-छात्राओं को जयपुर की शिक्षिका सोनल गुप्ता लाइव क्लास के माध्यम से उनकी गणित-विज्ञान की तैयारी करा रही है। क्लब के अध्यक्ष अवनेंद्र त्यागी, तिमली विद्यापीठ के आशीष डबराल ने बताया कि पहाड़ के सरकारी स्कूल-कॉलेजों में विज्ञान और गणित समेत अन्य विषयों के शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने लाइव क्लास की शुरूआत की है। इस क्लास के माध्यम से क्लब से जुड़े विभिन्न शहरों के शिक्षक बच्चों को पढ़ा सकेंगे। बताया कि क्लास के संचालन के लिए वी क्रॉप टैक्नोलॉजी कंपनी का सहयोग मिल रहा है। कंपनी के सीईओ रजनीश ने बताया कि पहाड़ के हर गांव में इस तरह की कक्षाएं चलाई जाएगी। 

 

प्रवासी उत्तराखंडियों को जोड़ा जाएगा 
तिमली विद्यापीठ के आशीष डबराल ने बताया कि इस तरह की क्लास के माध्यम से बच्चों को बेतहर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रवासी उत्तराखंडियों को जोड़ा जाएगा। ऐसे प्रवासी जो शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हो और अपने प्रदेश के लिए कुछ करना चाहते हो। ऐसे प्रवासियों को उत्तराखंड टैक्नोलॉजी क्लब से जोड़ा जा रहा है। 

 

सरकारी स्कूलों में चलेगी क्लास
टैक्नोलॉजी क्लब के अध्यक्ष अवनेंद्र त्यागी एवं आशीष डबराल ने बताया कि फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तिमली विद्यापीठ में यह क्लास शुरू की गई है। सरकार और शिक्षा विभाग से बात कर इस तरह की मुफ्त कक्षाएं बच्चों के लिए संचालित की जाएगी। जिससे शिक्षकों की कमी के बाद भी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

 

 
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