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सांसद के गोद लिए गांव ‘बाछम’ में चुनाव बहिष्कार का ऐलान, पढ़िए पूरी खबर

चुनाव से ठीक पहले सांसदों के गोद लिए ‘सांसद आदर्श गांव’ की हकीकत सामने आने लगी है। अनदेखी पर राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा के गोद लिए बागेश्वर के बाछम गांव के लोगों ने बुधवार को आम चुनाव के बहिष्कार की का ऐलान किया है। ग्रामीणों ने आजादी के 71 साल बाद भी गांव में मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई है।

बाछम के लोगों की नाराजगी: बाछम गांव के पंचायतघर में बुधवार को ग्रामीणों की बैठक में ग्रामीणों ने सड़क, मोबाइल और बैंकिंग नेटवर्क के अभाव पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि बाछम-पिंडारी पुल से गांतोली तक सड़क अब तक नहीं बनाई गई है। साथ गांव में पोस्ट ऑफिस और सीवीसी बैंक की स्थापना, मोबाइल सेवा देने, देवीकुंड, नाकुंडा, सुंदरढूंगा को छठा धाम घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सांसद आदर्श गांव के दर्जे के बावजूद गांव में तमाम समस्याएं जस की तस हैं। जूनियर हाईस्कूल बाछम का उच्चीकरण और रिक्त पदों पर अध्यापकों की तैनाती यहां अब तक नहीं हुई है। 

नहीं देंगे वोट 
वक्ताओं ने कहा कि आज तक उन्हें सिर्फ छला गया है। उनके गांव में करीब 1200 वोटर हैं। जो अब तक लोकतंत्र मजबूत करने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन अब वे कोरे आश्वासन के भरोसे नहीं रहेंगे। बैठक में भगवत सिंह ने बताया कि अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है। बैठक में प्रधान आनंद राम, लीला देवी, रतन सिंह, दिगंबर सिंह, चंदन सिंह, तारा सिंह, भगवत सिंह, लोकपाल सिंह, गोविंद राम, भगवत सिंह, धीरेंद्र सिंह, खिमुली देवी, जवाहर सिंह आदि रहे।

 

कपकोट के आदर्श गांव बाछम को मैंने सांसद निधि से 10 लाख रुपये जारी किए हैं। मगर, इस गांव की दूसरी समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार सुध नहीं ले रही है। 
प्रदीप टम्टा, राज्यसभा सांसद

 

दूसरे आदर्श गांव की स्थिति भी बेहतर नहीं 
पिथौरागढ़। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र के दूसरे सांसद आदर्श गांव जुम्मा में सड़क सुविधा तक नहीं है। इस गांव में अस्पताल तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं है। यहां जीजीआईसी में शिक्षकों के आधे से पद खाली पड़े हैं।  धारचूला के सीमांत गांव जुम्मा को क्षेत्रीय सांसद और केन्द्रीय मंत्री अजय टम्टा ने वर्ष 2014 में गोद लिया था। गांव को सांसद आदर्श गांव का नाम मिलने से लोगों केा विकास की उम्मीद जगी। लेकिन इस गांव के  लोग आज भी शहर जाने के लिए दस किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। गांव में सड़क न होने से सबसे बड़ी दिक्कतें गर्भवती महिलाओं और रोगियों को उठानी पड़ती है। जुम्मा गांव का अस्पताल लंबे समय से एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। इसलिए लोगों को कई किमी की पैदल यात्रा कर धारचूला आना पड़ता है। 


मैंने जुम्मा गांव का अपने कार्यकाल में चार बार दौरा किया है। सांसद निधि से 14 किमी सड़क मंजूर कराई है। आठ करोड़ की धनराशि दी गई है। इसमें 6 किमी सड़क का कार्य पूरा हो गया है। 
अजय टम्टा, क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री 

 

 

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  • Web Title:villagers from bacham in bageshwar district announced to boycott general elections 2019