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टनल के अंदर जिंदगी-मौत के बीच जंग लड़ रहे मजदूरों में उम्मीद, गब्बर सिंह नेगी के हौसले को सलाम

उत्तरकाशी टनल हादसे में पिछले 10 दिनों से फंसे नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के फोरमैन गब्बर सिंह नेगी (51) सहित 40 मजदूरों को उम्मीद है कि सभी सिलक्यारा-बड़कोट टनल के अंदर से बाहर आएंगे।

टनल के अंदर जिंदगी-मौत के बीच जंग लड़ रहे मजदूरों में उम्मीद, गब्बर सिंह नेगी के हौसले को सलाम
Himanshu Kumar Lallउत्तरकाशी, लाइव हिन्दुस्तानWed, 22 Nov 2023 08:29 PM
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उत्तरकाशी टनल हादसे में पिछले 10 दिनों से फंसे नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के फोरमैन गब्बर सिंह नेगी (51)  सहित 40 मजदूरों को उम्मीद है कि वे सभी जल्द ही सिलक्यारा-बड़कोट टनल के अंदर से सुरक्षित बाहर आ सकेंगे। रेस्क्यू ऑपरेशन दल के एक अधिकारी का कहना है कि सिंह लगातार कोशिश कर रहे हैं कि टनल में फंसे सभी लोगों के मनोबल में किसी भी प्रकार से कोई कमी न आए।

हिन्दुस्तान टाइम्स के अमित बाथल की रिपोर्ट के अनुसार, टनल के अंदर फंसे हुए मजदूरों से बात कर रहे सरकारी मनोचिकित्सक डॉ. अभिषेक शर्मा ने कहा, "कंपनी के कुछ मजदूरों ने मुझे बताया कि वह पहले भी ऐसी ही स्थिति में थे। मुझे यकीन नहीं है कि वह पहले भी ऐसे ही स्थिति में थे। हमने यही सुना है।" ...वह उम्मीद नहीं छोड़ते और सभी का आत्मविश्वास ऊंचा रखते हैं।" नेगी दो दशकों से अधिक समय से 8.45 किमी लंबी काजीगुंड-बनिहाल सुरंग सहित सुरंग निर्माण और कंपनी के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल रह चुके हैं।

गब्बर के भाई और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी जयमल सिंह नेगी ने कहा, "वह मानसिक रूप से काफी मजबूत है। मैं उससे नौकरी छोड़ने के लिए कई बार कह चुका हूं, क्योंकि सुरंगों में काम करना काफी खतरनाक है। लेकिन वह हमेशा कहता था कि जीवन वैसे भी कठिन है। और वह अपने परिवार का भरण-पोषण करना है।

कहा कि आज सुबह मैंने दूसरी तरफ भेजे गए माइक्रोफोन के जरिए मैंने जब उससे बात कि तो कहा कि तुम्हें जल्द ही बाहर निकाल लिया जाएगा, तो उसने कहा कि मलबे के अंदर से भेजी गई 800 और 900 मिमी की पाइप के जरिए बाहर निकलने वाला आखिरी व्यक्ति बनना चाहता है।

यहां तक कि अन्य फंसे हुए मजदूरों के परिवारों ने भी मुझे उसका (गब्बर) नाम बताया है कि वह काफी मजबूत व्यक्ति होने के साथ ही मजदूरों को उम्मीद न खोने की बात कह रहे हैं।  आकाश नेगी ने 14 नवंबर को जब अपने पिता गब्बर की आवाज सुनी तो उन्होंने मुझे चिंता न करने के लिए कहा और कहा कि वह अंदर ठीक हैं। वह हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। भले ही वह हमेशा घर से बाहर रहे और कंपनी के लिए विभिन्न निर्माण परियोजनाओं पर काम किया, लेकिन उन्होंने हमें कभी भी वास्तविक स्थिति के बारे में नहीं बताया।

सुरंग निर्माण कंपनी के स्टोरकीपर अजय कुमार ने कहा, "वह बहुत दयालु और बड़े दिल वाले व्यक्ति हैं...वह हर युवा कर्मचारी को अपने बेटे की तरह मानते हैं।" कुमार ने कहा, "वह सिल्क्यारा-बारकोट सुरंग परियोजना में शामिल होने वाले पहले लोगों में से हैं। हर कोई उन्हें जानता है..आप पास की चाय की दुकानों पर जा सकते हैं और उनके बारे में पूछ सकते हैं, वे उनके बारे में केवल अच्छे शब्द ही कहेंगे।"

कंपनी के एक अन्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "मुझे इस तथ्य के बारे में नहीं पता कि क्या वह पहले भी ऐसी ही स्थिति में था, लेकिन हम दोनों ने काजीगुंड-बनिहाल सुरंग के निर्माण में एक साथ काम किया था। वह सुरंग निर्माण में काम करने से कभी नहीं डरेंगे।" एसडीआरएफ कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने कहा कि गब्बर सिंह नेगी और  शबा अहमद कंपनी के दो फोरमैन टनल के अंदर फंसे हुए हैं। कहा कि जब भी उनसे बात की जाती है दोनों  सकारात्मकता दिखाते हैं और दूसरों को भी सकारात्मक रखते हैं। 


 

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