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विज्ञान पर विश्वास और आस्था पर आस ने दिखाई राह, उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू अभियान में निकले 41 मजदूर

उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू अभियान मंगलवार रात को पूरा हो गया है। सुंरग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए कई प्लान बने।

विज्ञान पर विश्वास और आस्था पर आस ने दिखाई राह, उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू अभियान में निकले 41 मजदूर
Himanshu Kumar Lallउत्तरकाशी, हिन्दुस्तानWed, 29 Nov 2023 10:16 AM
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उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू अभियान मंगलवार रात को 41 मजदूरों के बाहर निकलने के साथ ही पूरा हो गया है। सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए रेस्क्यू अभियान में विज्ञान पर विश्वास के साथ ही आस्था ने भी रेस्क्यू टीम का मनोबल बढ़ाया है। 

आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के साथ ही बाबा बौखनाग की नित्य पूजा-अर्चना की गई। सिलक्यारा टनल हादसे को लेकर कई तरह की बातें सामने आईं हैं। दिवाली के दिन जब हादसा हुआ और मजूदर टनल में फंसे तो स्थानीय लोगों ने कार्यदायी कंपनी पर बौखनाग देवता की अवहेलना करने का आरोप लगाया।

वाण और मंजगांव के लोगों ने कहा कि जिस स्थान पर टनल का काम शुरू किया गया, वहां पर टिन से बना बाबा का मंदिर था, जिसे कंपनी ने हटाकर टनल के अंदर रख दिया था। उनका दावा था कि बाबा के रोष के चलते मजूदर टनल में फंसे हैं।

शुरुआती दौर में किसी ने लोगों की बातों पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब रेस्क्यू अभियान में लगातार बाधाएं आने लगीं तो बाबा की शरण में भी जाना पड़ा। बाबा के मंदिर को टनल के बाहर रखा गया। बाबा की डोली को भी सुरंग में लाया गया।

तीन दिन पहले कार्यदायी कंपनी के प्रतिनिधि भाटिया गांव पहुंचे और बाबा के पश्वा से क्षमा याचना की गई। बाबा ने तीन दिन में अभियान सफल होने का वचन दिया। बाबा के वचनों के अनुसार मंगलवार दोपहर बाद पाइप आर-पार हुआ।

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह, सीएम धामी समेत वीवीआईपी नत्मस्तक होते दिखे। आस्ट्रेलिया से आए टनल विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने भी देवता की पूजा-अर्चना की।

जब सड़क बनी, तब भी आई थीं बाधाएं
स्थानीय लोग बताते हैं जब धरासू से बड़कोट के लिए सड़क बनी, तब भी यहां काम में बाधा आई थी। सिलक्यारा तक तो सड़क बन गई थी, लेकिन इससे आगे लगातार बाधाएं आने लगीं, तब भी देवता के कहने पर सड़क का समरेखण बदलना पड़ा और राडी टॉप से सड़क ले जानी पड़ी। ठेकेदार ने राडी टॉप पर बाबा बौखनाग का मंदिर भी बनवाया था।

अंतर्राष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स फिर जाएंगे बौखनाग के दरबार
उत्तरकाशी रेस्क्यू अभियान में शामिल किए गए अंतर्राष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि मिशन में एक चमत्कार हुआ और वह मंदिर जाएंगे क्योंकि जब ऑपरेशन चल रहा था तो उन्होंने मंदिर में 'धन्यवाद' कहने का वादा किया था। अर्नोल्ड डिक्स जिनेवा स्थित इंटरनेशनल टनलिंग अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के प्रमुख हैं।

कहा कि उन्होंने शुरुआत में कहा था कि 41 लोग क्रिसमस तक सुरक्षित घर लौट जाएंगे। क्रिसमस जल्दी आ रहा है। रेस्क्यू अभियान की सफलता पर बोलते हुए अर्नोल्ड ने कहा कि हम शांत थे और हम जानते थे कि हम क्या चाहते हैं। हमने एक अद्भुत टीम के रूप में काम किया। इंजीनियर, सेना, और सभी एजेंसियों ने एक साथ मिलकर काम कर मिशन को सफल बनाया।  कहा कि टलन रेस्क्यू मिशन चुनौतीपूर्ण था, लेकिन कड़ी सफलता के बाद हमे कामयाबी मिली। 
 

 

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