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टनल के ऊपर तक सड़क तैयार, ड्रिलिंग शुरू, 5 एजेंसियों ने संभाला मोर्चा, जल्द मिलेगी खुशखबरी

उत्तरकाशी में सुरंग से मजदूरों को निकालने को लेकर राहत और बचाव का कार्य नए सिरे से शुरू कर दिया गया है। सुरंग में ऊपर से ड्रिलिंग करने के लिए एक ही दिन में पहाड़ी की चोटी तक सड़क बना ली गई है।

टनल के ऊपर तक सड़क तैयार, ड्रिलिंग शुरू, 5 एजेंसियों ने संभाला मोर्चा, जल्द मिलेगी खुशखबरी
Krishna Singhभाषा-वार्ता,उत्तरकाशीSun, 19 Nov 2023 11:34 PM
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उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे में राहत बचाव का कार्य नए सिरे से शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सुरंग में ऊपर से ड्रिलिंग करने के लिए एक ही दिन में पहाड़ी की चोटी तक सड़क बना ली गई है। 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए पांच विकल्पों पर एक साथ काम किया जाएगा। इन विकल्पों को पूरा करने के लिए पांच अलग-अलग एजेंसियां तय की गई हैं। सिलक्यारा में शुक्रवार दोपहर दो बजे से ड्रिलिंग का काम बंद कर दिया गया था जो रविवार शाम चार बजे यानी 50 घंटे बाद फिर से शुरू हो गया है। इस रिपोर्ट में जानें राहत और बचाव कार्य का ताजा अपडेट...

पांच एजेंसियों ने संभाला मोर्चा
अधिकारियों ने बताया कि एक ही दिन में पहाड़ की चोटी तक सड़क बना ली गई है। हालांकि सुरंग में बचाव का काम रविवार को लगभग रुका रहा। समाचार एजेंसी यूनिवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम चार बजे से ड्रिलिंग कार्य शुरू हो गया है। पांच एजेंसियों ने राहत और बचाव कार्य में मोर्चा संभाल लिया है। एजेंसियों ने बचाव अभियान के अगले चरण के लिए खुद को तैयार कर लिया है। ये एजेंसियां पांच विकल्पों पर एक साथ काम करेंगी ताकि जल्द से जल्द टनल में फंसे मजदूरों को निकाला जा सके। 

इन एजेंसियों को जिम्मेदारी
इन एजेंसियों में तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी), सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएनएल), रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल), राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसीएल) शामिल हैं। टिहरी जलविद्युत विकास निगम (टीएचडीसी) बड़कोट छोर से 'माइक्रो टनलिंग' का काम शुरू करेगी। इसके लिए भारी मशीनरी पहले ही जुटाई जा चुकी है। टीएचडीसी रविवार रात से ही काम शुरू कर देगी। 

ऊपर से ड्रिलिंग शुरू
समाचार एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, रेल विकास निगम लिमिटेड ने मलबे के पहाड़ की चोटी तक पहुंच मार्ग का काम पूरा होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए लंबवत पाइपलाइन पर काम शुरू कर दिया है। बचाव टीमें और सरकार सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों का मनोबल बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। जिस क्षेत्र में मजदूर फंसे हुए हैं, वह 8.5 मीटर ऊंचा और दो किमी लंबा है। इसमें सुरंग का निर्मित हिस्सा शामिल है जहां कंक्रीटिंग का काम पूरा हो गया है, जिससे श्रमिकों को सुरक्षा मिल रही है।

जुटाई गई भारी मशीनरी
इन एजेंसियों में तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी), सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएनएल), रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल), राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसीएल) शामिल हैं। टिहरी जलविद्युत विकास निगम (टीएचडीसी) बड़कोट छोर से 'माइक्रो टनलिंग' का काम शुरू करेगी। इसके लिए भारी मशीनरी पहले ही जुटाई जा चुकी है। टीएचडीसी रविवार रात से ही काम शुरू कर देगी। 

शुक्रवार को रोक दी गई थी ड्रिलिंग
निर्माणाधीन सुरंग का सिलक्यारा की ओर से मुहाने से 270 मीटर अंदर करीब 30 मीटर का हिस्सा पिछले रविवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे ढह गया था। तब से श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने के लिए बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। सिलक्यारा छोर से 60 मीटर की दूरी पर ढहे हुए हिस्से के मलबे के बीच बोरिंग को शुक्रवार दोपहर तब रोक दिया गया था जब अमेरिका निर्मित ऑगर मशीन को लगभग 22 मीटर के बाद एक कठोर बाधा का सामना करना पड़ा था।

जल्द मिल सकती है खुशखबरी
इसके बाद शुकवार को बचाव अभियान की पुन: समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने के लिए कई वैकल्पिक योजनाएं बनाईं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मौके पर बचाव कार्यों की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिकी ऑगर मशीन से मलबे में क्षैतिज ड्रिलिंग करना सुरंग में फंसे श्रमिकों तक सबसे जल्दी पहुंचने का तरीका है। उन्होंने ढाई दिन में सफलता मिलने की उम्मीद जताई।

फिर शुरू होगी ड्रिलिंग
बचावकर्मियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के बाद यह ड्रिलिंग सोमवार को फिर से शुरू होगी। बचावकर्मियों ने रविवार शाम तक मलबे में 39 मीटर तक छह इंच चौड़ी ट्यूब डाल दी। यह ट्यूब जब ढहे हुए हिस्से को पार कर जाएगी, तो फंसे हुए श्रमिकों को इस पाइप के माध्यम से भोजन और पानी भी भेजा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि चार इंच के एक छोटे पाइप का उपयोग 'कंप्रेशन' (दबाव) के लिए किया जा रहा है और इसके माध्यम से भोजन, पानी, ऑक्सीजन और दवाइयां भेजी जा रही हैं।

पाइपलाइन पर काम शुरू
रेल विकास निगम लिमिटेड ने मलबे के पहाड़ की चोटी तक पहुंच मार्ग का काम पूरा होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए लंबवत पाइपलाइन पर काम शुरू कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि हम इस समय एक साथ छह विकल्पों पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय भी बचाव अभियान की करीब से निगरानी कर रहा है। हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता सभी फंसे श्रमिकों को जल्द से जल्द बचाना है। जिस भी मशीन की या तकनीकी सहायता की जरूरत होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी।

श्रमिकों को दी जा रही दवाएं
नितिन गडकरी ने कहा कि फंसे हुए श्रमिकों को लगातार ऑक्सीजन, बिजली, खाना, पानी और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिस पाइप से अब तक खाने की आपूर्ति की जा रही है, उसके अलावा एक ज्यादा बड़े व्यास का वैकल्पिक पाइप भी डाला गया गया है ताकि उन्हें रोटी, सब्जी और चावल भी उपलब्ध कराया जा सके। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सलाह मांगी गई है कि फंसे श्रमिकों को सकुशल जल्द बाहर निकालने के लिए क्या तरीके अपनाए जाएं। 

पांच-विकल्प वाली कार्ययोजना पर काम
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि मंत्री ने सुझाव दिया है कि मलबे की चोटी और सुरंग की छत के बीच जगह हो सकती है। रोबोट द्वारा यह पता लगाया जा सकता है कि क्या एक और पाइप को अंदर धकेला जा सकता है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग सचिव अनुराग जैन ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार 12 नवंबर से उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इसके लिए पांच-विकल्प वाली कार्ययोजना पर काम कर रही है।

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