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उत्तरकाशी से केदारनाथ धाम की दूरी बढ़ी, जानिए वजह

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू की प्रारंभिक रिपोर्ट में जोशियाड़ा पुल पर भारी वाहनों का संचालन बंद करने की संस्तुति के बाद  जिलाधिकारी डा. आशीष चौहन ने जोशियाड़ा मोटर पुल पर भारी वाहनों का संचालन बंद करा दिया है। पुल पर भारी वाहनों पर रोक लगने के बाद केदारनाथ, धौंतरी, लम्बगांव, घनसाली, प्रताप नगर को जाने तथा इन क्षेत्रों से उत्तरकाशी आने वाले भारी वाहनों को मनेरा बडे़थी और तेखला पुल से होकर मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है। इसके चलते वाहनों को करीब चार से पांच किमी. की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।  जोशियाड़ा-बाड़ागड्डी और गाजणा क्षेत्र के कई गांवों के साथ केदारनाथ यात्रा को जोड़ने वाले जोशियाड़ा पुल का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ था। जो निर्माण के बाद अबतक वर्ष 1978, 2012 और 2013 में आई भीषण बाढ़ को झेल चुका है। बाढ़ से भागीरथी नदी पर बने जहां कई पुल नदी के प्रवाह से जमींदोज हुए थे वहीं बाढ़ से इस पुल को भी क्षति पहुंची थी। वर्तमान समय में इस पुल की हालत इतनी नाजुक है कि भारी वाहनों की आवाजाही से कभी भी पुल ध्वस्त हो सकता है।

भारी वाहनों की आवाजाही से गत वर्ष गंगोरी में बैलीब्रिज टूटा तो प्रशासन को इस पुल की सुरक्षा की याद आयी। गत वर्ष 2018 में  इस पुल पर एक साथ दो भारी वाहनों के चलने पर प्रशासन ने रोक लगा दी, लेकिन चोरी छुपे आवाजाही होती रही। जर्जर स्थिति को लेकर आइआइटी बीएचयू ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट डीएम को सौंपी, जिसमें बताया गया कि पुल भारी वाहन का भार सहने की स्थिति में नहीं है। गत सप्ताह डीएम डा. आशीष चौहान ने पुल का औचक निरीक्षण किया और भारी वाहनों के आवगमन पर रोक लगाने के निर्देश दिए। भारी वाहनों के आवागमन तेखला व मनेरा पुल से करने को कहा। पुल के दोनों ओर बैरियर लगाने का कार्य शुरू किया और गत एक मई से पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से बंद कर दी। 

जोशियाड़ा मोटर पुल 1968 का बना हुआ है। उस समय यह पुल हल्के वाहनों के लिए बना था। अब इस पुल पर काफी लोड बढ़ गया है। इस पुल से आरसीसी मैटेरियल हटाकर स्टील की डैक लगाने की योजना है। इसके लिए आइआइटी बीएचयू सर्वे कर रही है। डिटेल सर्वे होने के बाद मरम्मत का डिजाइन आदि तैयार किया जाएगा। फिलहाल भारी वाहनों का संचालन इस पुल से बंद किया गया है। 
राजेंद्र खत्री, ईई, लोनिवि भटवाड़ी उत्तरकाशी

 

समय पर मरम्म्त न होने से जर्जर हुआ पुल
वर्ष 1958 में बना जोशियाड़ा मोटर पुल जोशियाड़ा-बाड़ागड्डी एवं गाजणा के दर्जनों गांवों के साथ ही टिहरी जनपद के बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र को उत्तरकाशी से जोड़ने का मुख्य पुल है। जिस पर वर्ष 2012, 2013 की आपदा के बाद से लोड बढ़ा हुआ है। छह दशक बाद भी किसी ने ठीक ढंग से पुल की मरम्मत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।

 

नए पुल के निर्माण को लेकर लापरवाही 
जिला मुख्यालय के सामने स्थित जोशियाड़ा, लदाड़ी, कंसेण, डांग, कोटी, कोटियालगांव, बोंगा, भेलुड़ा, सहित बाड़ागड्डी व गाजणा पट्टी को जोड़ने वाला जोशियाड़ा मोटर पुल को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू ने अपनी रिपोर्ट में जोशियाड़ा पुल को भारी वाहनों की आवाजाही के लिए खतरनाक घोषित किया है।  बावजूद इसके नये पुल निर्माण की कार्यवाही अभी ठंडे बस्ते में है। नए पुल निर्माण के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन ने दावे कर अपने स्वर तो बुलंद किए। लेकिन अभी तक पुल कहां पर बनना है इसके लिए पुल का सर्वे तक नहीं किया गया है। 


 

 

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