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Uttarkashi Tunnel Collapse Live: उत्तरकाशी टनल हादसे की क्या होगा कारण? वजह तलाशने पहुंचे भू-वैज्ञानिक

यमुनोत्री हाईवे पर रविवार तड़के सुरंग के अंदर मलबा आने की वजह से टनल में मजदूर फंसे है। टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सकुशल बाहर निकालने का प्रयास युद्ध स्तर से जारी है। रेस्क्यू टीम का प्रयास जारी है।

Uttarkashi Tunnel Collapse Live: उत्तरकाशी टनल हादसे की क्या होगा कारण? वजह तलाशने पहुंचे भू-वैज्ञानिक
Himanshu Kumar Lallउत्तरकाशी, हिन्दुस्तानTue, 14 Nov 2023 10:01 AM
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सुरंग में मलबा आने से 40 लोग फंस गए हैं। यमुनोत्री हाईवे पर रविवार तड़के सुरंग के अंदर मलबा आने की वजह से टनल में मजदूर फंसे है। सुरंग में फंसे लोगों की जान बचाने को रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, बीआरओ के संयुक्त टीम द्वारा राहत व बचाव का कार्य जारी है।

टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सकुशल बाहर निकालने का प्रयास युद्ध स्तर से जारी है। रेस्क्यू  टीम द्वारा कंप्रेस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए टनल के अंदर पाइप की मदद से ऑक्सीजन, और खाद्य सामग्री भेजी गई है।  

LIVE UPDATE:

11:55  AM: हादसे की जांच करने पहुंचे भू-वैज्ञानिकभू वैज्ञानिकों ने सिलक्यारा में टनल में हुए भूस्खलन की जांच शुरू कर दी। भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएसडीएमए) के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार की अध्यक्षता में गठित अध्ययन कमेटी ने टनल के भीतर और टनल के ऊपर पहाड़ी का सर्वे किया। मंगलवार सुबह कमेटी सदस्यों ने मौके पर जाकर बारीकी से भूस्खलन की वजह की पड़ताल की और सैंपल भी एकत्र किए।

मालूम हो किबीते रोज आपदा प्रबंधन सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा ने इस अध्ययन कमेटी का गठन किया था। सूत्रों के अनुसार भूवैज्ञानिक यह जानने का प्रयास कर रहे है कि निर्माण से पहले किए गए सर्वेक्षणों के बावजूद भूस्खलन की स्थिति क्यों पैदा हुई? साथ ही इस क्षेत्र में आगे भविष्य के लिए क्या खतरे हो सकते हैं। कमेटी सरकार को सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद भूस्खलन के कारण बताएगी और सुरक्षात्मक उपायों के सुझाव भी देगी।

कमेटी में वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालय जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. खइंग शिंग ल्युरई, जीएसआई के वैज्ञानिक सुनील कुमार यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक- सीबीआरआई कौशिल पंडित, उपनिदेशक भूतत्व एवं खनिजकर्म विभाग- जी.डी प्रसाद और भूवैज्ञानिक- यूएसडीएमए तनड्रिला सरकार शामिल हैं।

11:15  AM: सुरंग में ह्यूम पाइप होते तो नहीं फंसती मजदूर की जान, चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
उत्तरकाशी  सिलक्यारा में ऑलवेदर प्रोजेक्ट के तहत बन रही सुरंग में यदि ह्यूम पाइप लगे होते तो मजदूर नहीं फंसते। जानकारों का कहना है कि ह्यूम पाइप की मदद से मजदूरों को जल्द सुरक्षित निकाला जा सकता था। अब ह्यूम पाइप का इंतजाम किया जा रहा है। ह्यूम पाइप की कमी की बात आने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को तत्काल दून व हरिद्वार से मंगाने के निर्देश दिए हैं।

परियोजना के एक अधिकारी के अनुसार, निर्माणाधीन टनल के नीचे, सुरक्षा की दृष्टि से ह्यूम पाइप लगाए जाते हैं। यदि सुरंग में ऊपर से मलबा गिरे और टनल बंद हो जाए तो अंदर फंसे लोगों को ह्यूम पाइप के माध्यम से आसानी से बाहर निकाल लिया जाता है। इसके बाद बंद टनल को खोलने की कार्रवाई की जाती है।

सिलक्यारा में भी पहले संबंधित कंपनी ने ह्यूम पाइप लगाए थे पर 15-20 दिन पहले उन्हें हटा दिया गया था। जिसका खामियाजा आज टनल के अंदर फंसे मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। उधर, स्थानीय निवासी अनिल नौटियाल ने बताया है जहां सुरंग बंद हुई है, वहां पहले भी मलबा आया था जिसके बाद यहां पर सपोर्ट दिया गया था।

10:50  AM: सुरंग में फंसे 40 लोगों की जान बचाने का रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन 
उत्तरकाशी के यमुनोत्री हाईवे पर सुरंग में फंसे 40 लोगों की जान बचान को रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सुरंग के अंदर मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर से मलबा हटाया जा रहा है। 

10:50  AM: सुरंग में फंसे 40 लोगों की जान बचाने का रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन 
उत्तरकाशी के यमुनोत्री हाईवे पर सुरंग में फंसे 40 लोगों की जान बचान को रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सुरंग के अंदर मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर से मलबा हटाया जा रहा है। 

10:30 AM: उत्तराखंड गठन के बाद तीन बार हो चुके टनल हादसे
राज्य गठन के बाद से अब तक उत्तराखंड में तीन ऐसे मौके आ चुके हैं, जब टनल धंसने या मलबा भरने से लोगों की जान पर बना आई है। दुखद स्थिति यह है कि प्रदेश बनने से अब तक कोई ऐसा सिस्टम नहीं बन पाया है जिससे कि आपदा की स्थिति में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब उत्तरकाशी के सिलक्यारा में चारधाम सड़क परियोजना (ऑलवेदर रोड) के तहत बन रही टनल में हुए हादसे ने एक बार फिर से राज्य में आपदा प्रबंधन इंतजामों को लेकर चिंता जगा दी है। रविवार सुबह टनल में फंसे लोगों को सोमवार शाम तक भी नहीं निकाला जा सका था।

10:15  AM: सुरंग में 40 लोगों को 30 घंटे और लड़नी होगी जिंदगी की जंग
टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए अभी 30 घंटे और इंतजार करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सरकारी मशीनरी ने टनल से मलबा निकालने का अभियान तो शुरू कर दिया है, पर सोमवार शाम से मजदूरों तक पहुंचने में मंगलवार शाम या बुधवार सुबह तक का वक्त लग सकता है। हालांकि टनल में उनके लिए ऑक्सीजन और खाने-पीने की सामग्री लगातार पहुंचाई जा रही हैं। 

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि अब तक टनल में 15 से 20 मीटर तक के हिस्से में मलबा साफ किया जा चुका है। मलबा निकालने के लिए दून से ओगर मशीन व ढाई फीट व्यास के पाइप मंगाए हैं। इससे सीवर लाइन की तर्ज पर ड्रिलिंग करते हुए रास्ता बनाया जाएगा। इसी रास्ते के जरिए सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।

9:50 AM:  वॉकी-टॉकी फेल, पाइप के जरिए हो रही बातचीत
टनल में फंसे मजदूरों से बातचीत में आधुनिक वॉकी-टॉकी पूरी तरह फेल हो गए जबकि पाइप के जरिए बात करने का परंपरागत फार्मूला ही काम आया। नेटवर्क ठीक नहीं होने की वजह से मौके पर वॉकी-टॉकी काम नहीं कर रहे थे।

ऐसे में एक कर्मचारी ने सुझाव दिया कि ऑक्सीजन वाले पाइप के जरिए बातचीत की जा सकती है। कर्मचारी सुखमंडल ने टनल के मुहाने से पाइप के जरिए आवाज लगाई। आवाज सुनकर भीतर फंसे मजदूरों ने पलटकर बात की। इस पाइप के जरिए बाहर मौजूद रेस्क्यू टीम को मजदूरों के सकुशल होने की जानकारी मिली।

9:30 AM: उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे श्रमिकों को बचाने को जल निगम की ‘ट्रंच लैस’ तकनीक का इस्तेमाल होगा। दून से जल निगम की ट्रंच लैस ओगर ड्रिलिंग मशीन को उत्तरकाशी भेजा है। साथ ही 800 एमएम के ह्यूम पाइप भी भेजे गए हैं। उत्तरकाशी में सुरंग के भीतर लगातार मलबा गिर रहा है।

ऐसे में श्रमिकों को किस तरह सुरक्षित बाहर निकाला जाए, इसकी योजना बनाने के लिए सोमवार सुबह आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा, सीवर लाइन एक्सपर्ट और जल निगम के सुरेश चंद्र पंत के साथ मौके पर पहुंचे। जल निगम के एमडी ने मौका मुआयना के बाद बताया कि टनल में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए ट्रंच लैस ओगर ड्रिलिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा।

ट्रंच लैस सीवर तकनीक में सड़कों के नीचे बिना सड़क को खोदे ही सीवर लाइन बिछा दी जाती है। इसी तकनीक से यहां भी 800 एमएम के बड़े सीवर लाइन के पाइप डाले जाएंगे। ये पाइप देहरादून और गाजियाबाद से उत्तरकाशी में घटनास्थल पर पहुंचाए जा रहे हैं।

इन्हीं पाइपों के जरिए श्रमिकों को बाहर निकाला जाएगा। ड्रिलिंग मशीन सोमवार रात तक मौके पर पहुंच जाएगी। उसके बाद फौरन ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए सीवर लाइन एक्सपर्ट को भी मौके पर तैनात किया गया है। एसई दीपक मलिक भी पूरे समय मौके पर रहेंगे।

 

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