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चुनाव जीते, शपथ ली, फिर भी साढ़े चार साल से कुर्सी पर नहीं बैठे इस शहर के मेयर, क्या है वजह?

Uttarakhand News: त्रेता युग में भरत के शासन चलाने की कहानी तो आपने सुनी होगी। लेकिन, हम जो कहानी बताने जा रहे हैं वह 21वीं सदी की है जहां गद्दी पर खड़ाऊ की जगह संकल्प पत्र विराजमान है।

चुनाव जीते, शपथ ली, फिर भी साढ़े चार साल से कुर्सी पर नहीं बैठे इस शहर के मेयर, क्या है वजह?
Krishna Singhअजय जोशी,रुद्रपुरSun, 23 Jul 2023 01:53 AM
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राम की खड़ाऊ राजगद्दी पर रखकर त्रेता युग में भरत के शासन चलाने की कहानी से तो सभी वाकिफ हैं। पर हम जो कहानी बताने जा रहे हैं वह 21वीं सदी की है और यहां गद्दी पर खड़ाऊ की जगह संकल्प पत्र विराजमान है। अयोध्या की जगह उत्तराखंड का रुद्रपुर और शहर पर शासन चलाने वाले हैं मेयर रामपाल सिंह। दूसरा निकाय चुनाव सिर पर आ चुका है लेकिन रामपाल आज तक मेयर की असल कुर्सी के बगल में बैठकर ही दफ्तर के काम निपटाते हैं। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब लोगों को नजूल भूमि का मालिकाना हक मिलेगा, तभी कुर्सी पर बैठेंगे।

धामी के सामने ही कुर्सी पर बैठेंगे
काम हुआ नहीं, इसलिए वह कुर्सी पर नहीं बैठे। अब उनका दावा है कि 50 मीटर जमीन का मालिकाना हक देने का कैबिनेट फैसला हो चुका है। लिहाजा अब वे चाहते हैं कि इस काम को पूरा करने वाले सीएम पुष्कर सिंह धामी के सामने ही वह कुर्सी पर बैठें। साल 2018 में रुद्रपुर से भाजपा के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़े रामपाल सिंह ने जनता से वादा किया था कि वह नजूल भूमि पर मालिकाना हक दिलाएंगे। उन्होंने अपने संकल्प पत्र में यह भी लिखा कि जब तक जनता को मालिकाना हक नहीं मिलेगा, वह जीत कर भी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। 

समर्थकों और अधिकारियों की बात नहीं मानी
रामपाल को इस संकल्प का फायदा मिला और वे अच्छे अंतर से जीतकर पहली बार रुद्रपुर के मेयर बने। दो दिसंबर 2018 को शपथ लेने पहुंचे रामपाल को उनके समर्थकों और अधिकारियों ने मेयर की कुर्सी पर बिठाना चाहा। लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस संकल्प को उन्होंने अब तक निभाया है।

70 फीसदी रुद्रपुर है नजूल भूमि पर
रुद्रपुर में नजूल भूमि पर मालिकाना हक का मामला हमेशा बड़ा राजनीतिक मामला रहा है। शहर का 65 फीसदी से ज्यादा हिस्सा नजूल भूमि पर बसा है। लगभग हर चुनाव में राजनीतिक दल इस मुद्दे को उठाते आए हैं। 1265 लोगों के आवेदन भूमि को फ्रीहोल्ड कराने के लिए वर्तमान में लंबित पड़े हैं। 

आठ बार मुख्यमंत्री और दस बार शहरी विकास मंत्री से मिले
अपने वादे को पूरा कराने के लिए रामपाल केवल आठ बार इसी काम के लिए मुख्यमंत्री से मिलने देहरादून गए और दस बार शहरी विकास मंत्री से मुलाकात की। रामपाल कहते हैं, इसके अलावा जब भी वह देहरादून जाते शहरी विकास मंत्री से जरूर मिलते। नगर निगम रुद्रपुर की ओर से शासन स्तर पर 5 से अधिक बार उन्होंने लिखित पत्राचार भी किया। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सरकार इस अहम मुद्दे पर जल्द लोगों को राहत देगी।

सरकार की मंजूरी मिलते ही पूरा हुआ वादा
अपना वादा पूरा कराने में रामपाल को साढ़े चार साल का लंबा वक्त लगा। 2021 में प्रदेश में नजूल नीति लाई गई, लेकिन गरीब परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। वहीं कुछ समय पहले ही कैबिनेट ने 50 वर्ग मीटर तक जमीन पर नि:शुल्क मालिकाना हक के प्राविधान को मंजूरी दी, तब रामपाल का वादा पूरा हुआ।
 
वादा पूरा करने के लिए किया संघर्ष
रुद्रपुर के मेयर रामपाल सिंह कहते हैं कि मैंने चुनाव में नजूल पर मालिकाना हक दिलाने का वादा क्षेत्र की जनता से किया था। वादा पूरा करने के लिए काफी संघर्ष किया। अब जाकर नई नजूल नीति में 50 वर्ग मीटर तक के भूखंड पर निशुल्क मालिकाना हक का रास्ता साफ हो पाया है। इसके लिए कुछ शर्तों को लेकर मामूली दिक्कत है, वह भी दूर हो जाएगी। मेरा संकल्प पूरा हो गया है। 23 जुलाई से मेयर की कुर्सी पर विधिवत बैठूंगा।

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