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उत्तराखंड में पलायन पर कम नहीं हुई टेंशन, 10 साल में 17 लाख लोग गांव छोड़ शहरों में बसे

वैसे तो अवस्थापना विकास के लिए केंद्र पोषित, राज्य पोषित और बाह्य सहायतित योजनाओं के तहत कई काम हो रहे हैं। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शहरों में अवस्थापना विकास के लिए योजना बनाई जा रही।

उत्तराखंड में पलायन पर कम नहीं हुई टेंशन, 10 साल में 17 लाख लोग गांव छोड़ शहरों में बसे
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानThu, 29 Feb 2024 11:11 AM
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उत्तराखंड में बीते दस साल में करीब 17 लाख लोग गांवों को छोड़कर शहरों में जा बसे हैं। इस पलायन के चलते जहां शहरों में आबादी का दबाव बढ़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए अब शहरों के विकास के लिए नई योजना शुरू की जा रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दस साल में उत्तराखंड के अलग-अलग पर्वतीय क्षेत्रों से लोग पलायन कर शहरों में बस गए हैं। इतनी अधिक आबादी के प्रवाह की वजह से शहरों में अवस्थापना विकास से लेकर सुविधाओं पर भारी दबाव बढ़ा है।

वैसे तो अवस्थापना विकास के लिए केंद्र पोषित, राज्य पोषित और बाह्य सहायतित योजनाओं के तहत कई काम हो रहे हैं। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शहरों में अवस्थापना विकास के लिए नई योजना बनाई जा रही है।

डेवलपमेंट ऑफ स्मार्ट अरबन क्लस्टर प्रोजेक्ट यानी यूएसयूसीपी तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत शहरों में नई बस रही आबादी के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास पर फोकस किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती आबादी की वजह से राज्य में शहरी स्थानीय निकाय, नगर निगम और नगर पालिका आदि की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

कस्बों और जिला मुख्यालयों में ज्यादा हुआ पलायन आर्थिक सर्वेक्षण में पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों से सबसे अधिक पलायन नजदीकी कस्बों में हो रहा है। इसके बाद सबसे अधिक लोग जिला मुख्यालयों में आ रहे हैं।

आयोग के विश्लेषण के अनुसार ग्राम पंचायतों से सबसे अधिक 38 प्रतिशत पलायन आसपास के कस्बों में हुआ, जबकि 23 प्रतिशत लोग गांव छोड़कर जिला मुख्यालय के आसपास चले गए।


 

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