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उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों में आपदा से नहीं होगा नुकसान, सर्वे के लिए बना धासूं प्लान  

उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों की मजबूती, धारण क्षमता (कैरिंग कैपिसिटी) की जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई। यूएलएमएमसी शहरों की भूमि और पहाड़ों की संरचनाओं का सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है।

उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों में आपदा से नहीं होगा नुकसान, सर्वे के लिए बना धासूं प्लान  
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, विशेष संवाददाताSat, 19 Aug 2023 11:46 AM
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उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों की मजबूती, धारण क्षमता (कैरिंग कैपिसिटी) की जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई। भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) विशेषज्ञ सर्वे एजेंसियों की मदद से शहरों की भूमि और पहाड़ों की संरचनाओं का सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा के अनुसार यूएलएमएमसी ने एजेंसियों के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रथम चरण में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के करीब 15 शहरों का भूगर्भीय सर्वेक्षण किया जाएगा।

सचिवालय में शुक्रवार को मीडिया कर्मियों से अनौपचारिक बातचीत में डॉ. सिन्हा ने कहा कि एजेंसियों के चयन के बाद जल्द से जल्द सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। जोशीमठ में भूधंसाव के बाद सरकार ने सभी पर्वतीय शहरों की कैरिंग कैपिसिटी की जांच करने का निर्णय किया है। सीएम पुष्कर धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को इसके निर्देश दिए थे।

पहाड़ों में निर्माण-नियोजन की सिफारिश भी करेगा सर्वे: शहरों की सर्वेक्षण रिपोर्ट में जहां जमीन और पहाड़ की भूगर्भीय संरचना का सर्वे होगा। वहीं उसकी कैरिंग कैपिसिटी के आधार पर वहां निर्माण और नियोजन के लिए सरकार को स्पष्ट सुझाव भी दिए जाएंगे। आपदा प्रबंधन सचिव के अनुसार पहाड़ और मैदान की परिस्थतियां भिन्न-भिन्न होती हैं। इसलिए निर्माण के जो मानक मैदान में लागू हैं, वो पहाड़ों में नहीं हो सकते। सर्वेक्षण के आधार पर क्षेत्रवार निर्माण के मानकों पर भी सुझाव दिए जाएंगे।

शहरों पर लगातार बढ़ रहा है दबाव: राज्य के शहरों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। हालिया कुछ वर्षों में पर्वतीय शहरों का काफी विस्तार हुआ है और यह क्रम लगातार जारी है। भूगोलविद प्रो. बीआर पंत बताते है हर क्षेत्र की अपनी एक विशिष्ट भौगोलिक संरचना होती है। निर्माण को अधिकतम झेलने की एक क्षमता होती है। यदि समय रहते पर्वतीय क्षेत्रों में अनियोजित विस्तार पर रोक न लगी तो काफी घातक परिणाम देखने पड़ सकते हैं।

इन शहरों का होगा सर्वेगढ़वाल मंडल
गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, लैंसडौन, मसूरी

कुमाऊं मंडल
नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, भवाली, रानीखेत, कपकोट, धारचूला, चंपावत।

आपदा से अब तक करोड़ों का नुकसान
इस साल 15 जून से अब तक प्राकृतिक आपदाओं की वजह से राज्य को 826 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। आपदा प्रबंधन सचिव के अनुसार सभी विभागों से नियमित रूप से नुकसान की रिपोर्ट ली जा रही है। उन्होंने बताया कि बरसात के बाद प्रमुख मागों के संवेदनशील पहाड़ों का भी अध्ययन किया जाएगा।

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