उत्तराखंड के पूर्व सीएम को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, जानिए क्या है मामला

Aug 15, 2020 06:17 pm ISTHimanshu Kumar Lall हिन्दुस्तान टीम, देहरादून,
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पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास के किराये में राहत दिलाने को अब सरकार सुप्रीम कोर्ट में विशेष रिट याचिका दायर करेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इसकी मंजूरी दे दी है। रूलक संस्था की जनहित...

उत्तराखंड के पूर्व सीएम को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, जानिए क्या है मामला

पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास के किराये में राहत दिलाने को अब सरकार सुप्रीम कोर्ट में विशेष रिट याचिका दायर करेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इसकी मंजूरी दे दी है। रूलक संस्था की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को पूर्व सीएम से बाजार दर पर किराया वसूलने के आदेश दिए थे। इस बीच सरकार ने उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुविधा (आवासीय एवं सुविधाएं) विधेयक 2019  सदन में पेश कर इसे कानून की शक्ल दे दी।

इसमें 31 मार्च, 2019 के बाद से पूर्व मुख्यमंत्रियों की आवासीय सुविधाएं खत्म कर दी गई थीं, जबकि इससे पूर्व के मुख्यमंत्रियों से मौजूदा किराये का  25 फीसदी अतिरिक्त लेने का निर्णय लिया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के ऐक्ट को सुपरसीट कर दिया।  आलीशन कोठियों का बाजारी मूल्य नहीं देने पर अब रूलक संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ ही मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है।

बाजार दर से इन पर लगभग पौने दो करोड़ रुपये बकाया है। सूत्रों ने बताया कि अब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड से इस पर चर्चा कर ली है। इस रिट का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है।


तीन पूर्व सीएम और सीएस को अवमानना का नोटिस
नैनीताल। हाईकोर्ट ने न्यायालय के पूर्व के आदेशों का अनुपालन न करने पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूड़ी और मुख्य सचिव ओम प्रकाश को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी को चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। एकलपीठ ने यह भी बताने को कहा है कि अभी तक किराये का भुगतान क्यों नहीं किया गया? शुक्रवार को इस पूरे प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ में हुई। देहरादून की रूलक संस्था ने अवमानना याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि पूर्व में हुई सुनवाई में कोर्ट ने मई 2019 में सभी पूर्व सीएम से सरकारी आवास का किराया एवं सुविधाओं का भुगतान छह माह के भीतर करने को कहा था। लेकिन अभी तक उनके द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। इसी वजह से ही रूलक संस्था की ओर से इन सभी के खिलाफ अवमानना याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई है।

चूंकि यह मसला अभी कोर्ट में है तो इस पर बोलना ठीक नहीं। राज्य सरकार इस पर जो फैसला लेगी, पार्टी की सहमति भी उस पर रहेगी।
बंशीधर भगत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

इस मामले का पटाक्षेप जल्द हो जाना चाहिए, यदि आदेश है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को किराये का भुगतान करना है तो करें। सरकार को यदि इस पर कोई फैसला लेना है कि जल्द निर्णय ले।
प्रीतम सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

यह पूरी तरह से नैतिकता का मामला है, जिस राज्य में आय के संसाधन बेहद सीमित हों वहां इस तरह की सुविधाएं बंद हों। इस राज्य में पूर्व सीएम की तादाद बढ़ती जा रही है, ऐसे में जनता के पैसे को इन पर खर्च करना न्यायसंगत नहीं है।
काशी सिंह ऐरी संरक्षक, उक्रांद

Himanshu Kumar Lall

लेखक के बारे में

Himanshu Kumar Lall
हिमांशु कुमार लाल पत्रकारिता में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह अंग्रेजी और हिंदी अखबारों सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ‘हिन्दुस्तान’ के डिजिटल पत्रकारिता में जुड़ने से पहले वह अंग्रेजी अखबार ‘ द पायनियर’ में उत्तराखंड स्टेट इंचार्ज रह चुके हैं। दो दशकों के लंबे पत्रकारिता के सफर में उन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘ द ट्रिब्यून’ और अमर अजाला सहित दूरदर्शन में भी अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता और मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। 2005 में डिफेंस कॉरेस्पोंडेंस कोर्स कर चुके हैं। वह उत्तराखंड से जुड़ी राजनीतिक, धार्मिक, पर्यटन, सामाजिक सहित जन सरोकार से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। डिफेंस, राजनीतिक, स्वास्थ्य, पर्यटन और क्राइम से जुड़ी खबरें में उनका विशेष रुझान है। और पढ़ें

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