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पयर्टन को मिले उड़ान, टिहरी सहित इन शहरों में जलाशयों पर सी-प्लेन उतारने का प्लान

हिन्दुस्तान टीम, रुद्रपुर नानकमत्ता Himanshu Kumar Lall
Tue, 30 Nov 2021 09:00 PM
पयर्टन को मिले उड़ान, टिहरी सहित इन शहरों में जलाशयों पर सी-प्लेन उतारने का प्लान

उत्तराखंड के जलाशयों में सी प्लेन उतारक पर्यटन को नए आयाम देने की कवायद शुरू हो गयी है। शुरुआती तौर पर टिहरी डैम, बौर जलाशय और नानकसागर जलाशय में सी प्लेन उतारने की योजना को लेकर सर्वे शुरू हो गया है। मंगलवार को मैरिटाइम इनर्जी हेली एअर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ नानकसागर डैम का स्थलीय निरीक्षण किया।

इस दौरान नानकसागर को सी प्लेन उतारने के लिए मुफीद पाया गया। इस संबंध में रिपोर्ट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को रिपोर्ट भेजी जाएगी। डीजीसीए की हरी झंडी मिलने पर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। सी प्लेन की योजना परवान चढ़ने पर उत्तराखंड में पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे।

सरकार और विमानन कंपनियां लगातार हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। ऐसे में जमीन और पानी में उड़ान भरने में सक्षम विमान सी-प्लेन की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन्हें एम्फीबियन विमान के नाम से भी जाना जाता है। ऊधमसिंह नगर जिले में स्थिति नानकसागर डैम 16.5 मीटर गहरा और 19200 मीटर लंबा है। डैम के किनारे से महज 100 से 150 मीटर की दूरी पर आसानी से साथ सी प्लेन उड़ान भरने में सक्षम होता है।

कंपनी ने मंगलवार को सी प्लेन चलाने के प्रोजेक्ट को लेकर स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें पाया गया कि बेहद आसानी के साथ यहां से सी प्लेन का संचालन हो सकता है। खासतौर पर पर्यटकों को रिझाने में सी प्लेन की योजना बेहद अहम साबित हो सकती है। कंपनी की योजना देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से नानकसागर और बौर जलाशय और टिहरी डैम में एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने की है।

भारत में 2010-2011 में लांच हुई थी सी प्लेन सेवा
मैरिटाइम इनर्जी हेली एअर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने डायरेक्टर मो. शफीक कुरैशी ने बताया कि भारत में उनकी कंपनी ने सबसे पहले अंडमान निकोबार में सी प्लेन सेवा शुरू की थी। कंपनी के को फाउंडर सिद्धार्थ वर्मा भारत में सी प्लेन लांच किया था। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अंडमान निकोबार के पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट से होवलैक आयरलैंड और नील डिगलीपुर आयरलैंड तक सी प्लेन चलाया गया था। इसके बाद मुंबई के जूहू एयरपोर्ट से पाउला डैम और एमीवैली लैक से गिरगांव चौपाली तक सी प्लेन चलाया गया।

बेहद कम खर्च में सी प्लेन सेवा होती है शुरू
एयरपोर्ट बनाने में बेहद ज्यादा खर्चा आता है लेकिन सी प्लेन के लिए आधारभूत ढांचा खड़ा करने में बेहद कम खर्च आता है। हालांकि, सी प्लेन की यात्री संख्या बेहत सीमिति होती है। सी प्लेन की खासियत यह है कि यह जमीन और पानी कहीं से भी उड़ान भर सकता है। साथ ही कहीं जमीन और पानी दोनों जगहों पर इसकी लैडिंग हो सकती है। महज 100 मीटर लंबाई वाले जलाशयों में भी सी प्लेन लैंड कराया जा सकता है।

नानकमत्ता के नानकसागर जलाशय में जल्द ही सी प्लेन सेवा शुरू होगी। इस सेवा के संचालन के संबंध में उत्तराखंड सरकार, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच पूर्व में हुए समझौते के क्रम में सी प्लेन सेवा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। नानकसागर जलाशय में सी प्लेन उतरेंगे। इससे पर्यटन का विकास होगा। सी प्लेन सेवा शुरू होने से नानकमत्ता साहिब देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों से हवाई सेवा से जुड़ जाएगा। इससे देश विदेश से पर्यटकों की तादाद बढ़ेगी।
डॉ. प्रेम सिंह राणा, विधायक, नानकमत्ता

नानकसागर डैम में सी प्लेन बेहद आसानी से उतर सकता है। स्थलीय निरीक्षण और सर्वे रिपोर्ट डीजीसीए को भेजी जाएगी। अभी यह योजना प्रारंभिक चरण में है। हमारा मकसद देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे से नानकसागर, बौर जलाशय और टिहरी डैम को जोड़कर पर्यटकों के लिए रोमांचक पर्यटक की संभावनाओं को बढ़ाना है। कंपनी शुरुआती तौर पर सेसना 208 एमसीबीएल नौ सीटर विमान उतराने की योजना पर काम करेगी।
मो. शफीक कुरैशी, डायरेक्टर, मैरिटाइम इनर्जी हेली एअर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड

 

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