DA Image
30 मार्च, 2021|1:22|IST

अगली स्टोरी

उत्तराखंड : चारधाम परियोजना से घट जाएगी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की दूरी

chardham project

केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पूरी होने पर यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ धाम की दूरी लगभग 65 किलोमीटर कम हो जाएगी। वर्तमान में चार धाम की दूरी 890 किलोमीटर है, लेकिन परियोजना के तहत बाईपास, नया एलाइमेंट होने पर यह दूरी घटकर 825 किलोमीटर हो जाएगी। सरकार का दावा है चारधाम परियोजना के कुल 53 पैकेज में से स्वीकृत 40 पैकेज पर तेजी से काम चल रहा है। जिसे अगले डेढ़ साल में पूरा कर लिया जाएगा।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चारधाम परियोजना का कुल बजट 12,000 करोड़ रुपये है। इसके स्वीकृत 40 पैकेज के तहत 637 किलोमीटर पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें से 425 किलोमीटर दो लेन राजमार्ग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। शेष 212 किलोमीटर राजमार्ग डेढ़ साल में बना लिए जाएंगे। दो लेन राजमार्गो की चौड़ाई 10 मीटर है। चारधाम परियोजना पूरी होने पर इसकी लंबाई 890 किलोमीटर से घटकर 825 किलोमीटर रह जाएगी। अधिकारी ने बताया कि परियोजना में कई स्थानों पर नया एलाइनमेंट व बाईपास बनाए जा रहे हैं। इससे चारधाम की कुल दूरी 65 किलोमीटर घट जाएगी।

इससे चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों का समय कम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि परयिोजना के 13 पैकेज के तहत 188 किलोमीटर राजमार्ग निर्माण की अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसमें गंगोत्री इको सेंसिटिव जोन के राजमार्ग शामिल हैं। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के समक्ष विचाराधीन है। जिसमें चारधाम परियोजना में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 10 मीटर से घटाकर सात मीटर करने की है। वहीं सरकार का तर्क है कि अधिक चौड़ा राजमार्ग (10 मीटर) होने पर यातायात सुगम चलता है, विशेषकर आपातकाल में सेना के भारी वाहनों को तेज से गति से चीन बार्डर पर पहुंचना आसान होगा। उन्होंने कहा कि समिति से हरी झंडी मिलने के बाद उक्त पैकेज को स्वीकृत कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि पिछले दिनों उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से हुई तबाही का कारण चारधाम परियोजना नहीं है। चारधाम परियोजना के शुरू करने से पहले भारतीय सर्वेक्षण विभाग के विशेषज्ञों से सलाह दी गई। इसके अलावा इसरो, डीआरडीओ, उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के विशेषज्ञ व वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर के फटने का कारण चारधाम परियोजना को नहीं बताया है। धरासू-गंगोत्री के बीच लगभग 124 किलोमीटर राजमार्ग निर्माण किया जाना है। इसके 94 किलोमीटर का हिस्सा इको सेसिंटिव जोन के चलते खतरनाक भूस्खलन जोन में आता है। इसलिए यहां राजमार्ग की चौड़ाई कम रखी जाएगी।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Uttarakhand : Distance between Yamunotri Gangotri Kedarnath and Badrinath will reduced from Chardham project