uttarakhand cricket team beats bihar team in ranji tournament - रणजी ट्रॉफी: मैच में जीत उत्तराखंड को ‘दिवाली’ तोहफा DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रणजी ट्रॉफी: मैच में जीत उत्तराखंड को ‘दिवाली’ तोहफा

रणजी ट्रॉफी के पहले मैच में ही बिहार को महज डेढ़ दिन में हराकर इतिहास रचने वाली उत्तराखंड की टीम के कप्तान रजत भाटिया ने जीत उत्तराखंड के लोगों को समर्पित की है। कहा कि पहले मैच में मिली यह जीत क्रिकेटरों की ओर से उत्तराखंड को दीपावली का तोहफा है। यह मैच जीतने के बाद रजत भाटिया ने कहा कि उत्तराखंड के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है।  यह मैच हमारे लिए बहुत जरूरी था। विजय हजारे में हम पहला मैच बिहार से हारे थे, तब बरसात के कारण हम मैच नहीं खेल सके थे। मगर इस बार हम पूरी तैयारी के साथ उतरे। टीम पूरी प्लानिंग के साथ खेलने उतरी। जिस तरह की विकेट हम चाहते थे, उस तरह की विकेट मिली। हमारे गेंदबाजों ने योजना को अमल में लाया और शानदार प्रदर्शन किया। जीत का श्रेय पूरी टीम को जाता है।  इस स्टेडियम में अफगानिस्तान और बांग्लादेश के मैच के बाद अधिक मैच नहीं हो सके हैं। हम यहां दस दिन पहले आए थे।  स्टेडियम में हमको प्रैक्टिस मैच खेलने को मिला, उसका फायदा भी हमें मिला है। पहले मैच में बिहार जैसी मजबूत टीम को हराना टीम को मनोवैज्ञानिक मजबूती देगा। मेरा मामना है कि अगर तैयारी पूरी हो और प्लानिंग पर अमल करें तो जीत जरूर मिलेगी। लड़के चार दिन बाद अपने परिवार से मिलने वाले थे, लेकिन मैच दो दिन पहले समाप्त होने से अब दो दिन पहले मिलेंगे। यह एक सेलिब्रेशन ही है। सभी त्योहार अच्छे से मनाएं और वापस तरोताजा होकर क्रिकेट में आएं, बस यही चाहते हैं। देहरादून में अभी चार मैच और होने हैं।

हमारे बल्लेबाजों को तेज विकेट पर खेलने का अनुभव नहीं: अमन
बिहार के स्पिनर अमन ने सबसे पहले उत्तराखंड को बधाई दी। कहा कि उत्तराखंड ने काफी अच्छा क्रिकेट खेला। यहां सीमिंग कंडीशन है, इसके लिए हमारे बल्लेबाज तैयार नहीं थे। हमारे यहां ग्रासी विकेट नहीं है, इतने तेज विकेट नहीं है। बल्लेबाजों को ग्रासी विकेटों पर खेलने का अभ्यास नहीं है। उत्तराखंड ने योजनाबद्ध जीत हासिल की है। उत्तराखंड की ताकत तेज गेंदबाजी है, इसलिए उत्तराखंड ने तेज विकेट बनाया। यह रणजी मैच में होता है, हर टीम होम ग्राउंड का एडवांटेज लेना चाहती है। आगे के मैचों के लिए अब तेज विकेटों की प्रैक्टिक करेंगे। हमारी स्ट्रैंथ स्पिनर है। उत्तराखंड के तेज गेंदबाजों ने सही जगह पर गेंदबाजी की और इसका उनको फायदा मिला। वहीं हमारे दोनों तेज गेंदबाज सही जगह पर गेंदबाजी नहीं कर सके। इसलिए तेज गेंदबाज फायदा नहीं उठा सके।

मां ने सिखाया कभी हार न मानना: धपोला 
रणजी ट्रॉफी के ऐतिहासिक मैच में उत्तराखंड की जीत के हीरो तेज गेंदबाज दीपक धपोला ने बागेश्वर में खेतों में खेलकर क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद दीपक की मां ने संघर्ष कर उनको आगे बढ़ाया। दीपक का कहना है कि आज वो जो भी हैं, अपनी मां की वजह से हैं। मां से ही उन्होंने सीखा कभी हार नहीं मानना। बागेश्वर में मंडलसेरा के दीपक धपोला राज्य के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं। मगर उनका सफर आसान नहीं रहा। साल 1991 में उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात दीपक के पिता मोहन सिंह धपोला शहीद हो गए थे। उस समय दीपक की उम्र छह माह थी। तब मां नीमा धपोला के कंधों पर बेटे दीपक के साथ ही दो देवरों और ननद के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई। बागेश्वर में किराये में रहकर भी उन्होंने दीपक को पढ़ाया और क्रिकेटर बनने का सपना पूरा करने के लिए दिल्ली भेजा। उन्होंने कहा कि बचपन में वो दोस्तों के साथ खाली पड़े खेतों में क्रिकेट खेलते थे। 11वीं की पढ़ाई के बाद वो दून आए। यहां दो साल तक क्रिकेट सीखा, लेकिन मान्यता नहीं होने से दिल्ली का रुख किया। 

उत्तराखंड के खिलाड़ियों में जबरदस्त प्रतिभा: भास्कर 
उत्तराखंड टीम के मुख्य कोच भास्कर पिल्लई जीत के बाद काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिभाएं बहुत हैं। खिलाड़ी बहुत मेहनत कर रहे हैं, इसका परिणाम जीत के रूप में मिला है। जिस तरह से टीम ने जीत दर्ज की है, उसे देखकर लगता है कि टीम इस बार क्वालीफाई जरूर करेगी। टीम को इसके बाद चार मैच घर में खेलने हैं, उसके लिए तैयारी कर रहे हैं। बाहर तीन मुकाबले खेलने हैं, उसके लिए भी अलग से रणनीति बना रहे हैं। हम अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं और कमजोरियां दूर करने की भी कोशिश कर रहे हैं।


 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:uttarakhand cricket team beats bihar team in ranji tournament