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सीएम ने क्रिकेट के लिए सियासी प्रतिद्वंद्विता की दरकिनार

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उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। राज्य के सबसे शक्तिशाली सियासी शख्सियत होने के बावजूद सीएम ने धुर विरोधी हीरा सिंह बिष्ट की एसोसिएशन को आगे रखा। क्रिकेट के सुनहरे भविष्य के लिए अपनी एसोसिएशन का विलय हीरा सिंह बिष्ट की एसोसिएशन में किया, यहीं से उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता का रास्ता भी खुला।  राज्य में क्रिकेट की मान्यता के लिए भले ही लंबा इंतजार करना पड़ा हो, लेकिन राज्य की सत्ता में त्रिवेंद्र सरकार आने के बाद इसके गंभीर प्रयास शुरू हो गए थे। सीएम त्रिवेंद्र ने खुद इसकी पहल की। उन्होंने पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट से राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार किया। अपनी क्रिकेट एसोसिएशन का विलय हीरा सिंह बिष्ट की एसोसिएशन में करने की पहल खुद की। इधर, खेल मंत्री अरविंद पांडे सीएम त्रिवेंद्र के मिशन को पूरा करने के लिए लगे हुए थे। उन्होंने एसोसिएशन को एक करने की पहल की। 2018 में खेल मंत्री के प्रयास से ही उत्तराखंड के लिए अलग कंससेस कमेटी बनी। बीसीसीआई के टूर्नामेंट में उत्तराखंड को मौका मिला। 

 

उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता मिलना राज्य हित में है। इससे क्रिकेट को बढ़ावा मिलने के साथ ही युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। अब उत्तराखंड के खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
त्रिवेंद्र रावत,  मुख्यमंत्री 

 

हीरा सिंह ने सीएम और मंत्री को सराहा
सीएम त्रिवेंद्र रावत और खेल मंत्री अरविंद पांडे के योगदान की वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट भी तारीफ करते हैं। वह कहते हैं कि त्रिवेंद्र भाई ने राजनीति से ऊपर उठकर काम किया। अरविंद भाई ने तो रातदिन लगकर इस मुकाम तक उत्तराखंड को पहुंचाया है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए हम सब एकुजट होकर आगे बढ़े हैं। 

 

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  • Web Title:uttarakhand chief minister ts rawat forgets political rivalry to get affiliation for uttarakhand cricket association in state