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सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर वन विभाग का ग्रहण

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट रिस्पना पुनर्जीवन अभियान को वन विभाग ही खत्म करने पर तुला है। अभियान के तहत राजपुर के केरयाण गांव में लगाए गए 25 हजार में से ज्यादातर पौधे सूख गए हैं या टूट गए हैं। पौधों की देखरेख के लिए लगाए गए तीन में से एक मजदूर ने चार माह से वेतन ना मिलने पर काम छोड़ दिया है। जबकि बाकी दो भी जल्द काम छोड़ सकते हैं। अभियान के तहत अगस्त में सीएम ने इस गांव में खुद ही पौधा रोपण किया था। पौधों को देखभाल के लिए तीन स्थानीय लोगों को छह हजार रुपये महीने की तनख्वाह पर रखा गया था। इनका काम पौधों को जानवरों, आग से बचाना, उनके आसपास से घास हटाना, लोगों को पौधे तोड़ने से रोकना और पानी देना था। नवंबर तक तो इन्होंने ठीक का किया। उन्हें हर माह वेतन मिलता गया। लेकिन दिसंबर से वेतन मिलना बंद हो गया। चार माह तक वे बिना वेतन के काम करते रहे, लेकिन अब एक मजदूर ने काम छोड़ दिया है। वन विभाग बजट न होने की वजह से वेतन नहीं दिए जाने की बात कह रहा है।

इस योजना के लिए एनएचएमएस के तहत बजट मिलना है। लेकिन पिछले कुछ माह से बजट नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण वेतन लटका हुआ। जहां तक पौधों के खराब होने की बात है तो बरसात में वे रिप्लेश कर दिए जाएंगे।
कहकशां नसीम, डीएफओ मसूरी 
 

 
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  • Web Title:Uttarakhand chief minister ts rawat dream river rispana rejuvenation project hangs in balance in dehradun