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UCC विधेयक उत्तराखंड राजभवन ने राष्ट्रपति की मंजूरी को भेजा, लिव-इन रिलेशन, बहु विवाह-तलाक पर भी कानून

भाजपा सरकार बनने पर सीएम धामी ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक यूसीसी लाने को मंजूरी दी और इसका ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में कमेटी बनी थी।

UCC विधेयक उत्तराखंड राजभवन ने राष्ट्रपति की मंजूरी को भेजा, लिव-इन रिलेशन, बहु विवाह-तलाक पर भी कानून
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानWed, 28 Feb 2024 07:55 PM
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समान नागरिक संहिता (यूसीसी-UCC Bill) विधेयक राजभवन ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद उत्तराखंड में यूसीसी कानून लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 6 फरवरी को यूसीसी विधेयक विधानसभा के पटल पर रखा था।

सात फरवरी को सदन से पारित होने के बाद विधायी विभाग की तरफ से इसे राजभवन को भेजा गया था। सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल लेफ्टीनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने परीक्षण के बाद इसे राष्ट्रपति भवन को भेज दिया है।

दरअसल, केंद्र की समवर्ती सूची में होने की वजह से इस विधेयक को राष्ट्रपति भवन की मंजूरी जरूरी है। इसके बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री सिंह पुष्कर धामी ने वर्ष 2022 में विधानसभा के चुनाव के दौरान जनता से वादा किया था भाजपा की सरकार बनने पर उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया जाएगा।

भाजपा सरकार बनने पर सीएम धामी ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक यूसीसी लाने को मंजूरी दी और इसका ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई थी।

कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा के सदन से पारित किया था। इसके साथ ही उत्तराखंड देश में पहला ऐसा राज्य बन चुका है जिसने विधानसभा के सदन से यह विधेयक पारित किया है।

अब राज्य सरकार ने यूसीसी को लेकर अब पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, जो इसकी नियमावली तैयार कर रही है।

क्या है यूसीसी में प्रावधान
-विवाह पंजीकरण - शादी के छह माह के भीतर विवाह पंजीकरण अनिवार्य
-शादी की उम्र - सभी धर्मों की लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 और लड़कों के लिए 21 तय
-बहु विवाह - पति या पत्नी के रहते दूसरी शादी यानि बहु विवाह नहीं कर सकता
-तलाक - पति जिस आधार पर तलाक ले सकता है, उसी आधार पर अब पत्नी भी तलाक की मांग कर सकेगी
-उत्तराधिकार - पैत्रिक संपत्ति पर लड़के और लड़कियों को बराबर अधिकार मिलेगा
-लिव इन रिलेशनशिप - लिव इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य। अलबत्ता, विवाहित पुरुष या महिला नहीं रह पाएंगे लिव इन में
-अधिकार क्षेत्र - राज्य का स्थायी निवासी, राज्य या केंद्र सरकार के स्थायी कर्मचारी, राज्य में लागू सरकारी योजना के लाभार्थी पर होगा लागू

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