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ग्रामीणों की प्यास ऐसे तो नहीं बुझेगी, उत्तराखंड में चार लाख घरों तक पानी पहुंचाने का नहीं कोई प्लान

हिन्दुस्तान टीम, देहरादूनPublished By: Himanshu Kumar Lall
Wed, 04 Aug 2021 10:37 AM
ग्रामीणों की प्यास ऐसे तो नहीं बुझेगी, उत्तराखंड में चार लाख घरों तक पानी पहुंचाने का नहीं कोई प्लान

उत्तराखंड में 4.06 लाख घर ऐसे हैं, जिनमें पानी पहुंचाने के लिए कोई पम्पिंग या ग्रेविटी की योजना ही नहीं है। 599 गांव वो हैं, जिनमें पानी सप्लाई के लिए कोई पाइप लाइन बेस्ड स्कीम नहीं है। मैदानी क्षेत्रों में लोग निजी ट्यूबवेल, सरकारी हैंडपंप और पहाड़ों पर स्रोतों के पानी पर निर्भर हैं। राज्य की कुल 39 हजार से अधिक बसावटों में से अभी 15,218 गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को पर्याप्त पानी मयस्सर नहीं है। इन गांवों में 4.06 घर लाख ऐसे हैं, जिनके लिए पेयजल की कोई योजना ही नहीं है। इस मामले में सबसे खराब स्थिति हरिद्वार जिले की है।

यहां 290 गांवों के 2.28 लाख घरों में पानी पहुंचाने को योजना बनानी होगी। ओवरहेड टैंक, ट्यूवबेल, पाइप लाइन का पूरा सिस्टम तैयार करना होगा। इसके अलावा यूएसनगर के 224 गांवों में 1.77 लाख घर और नैनीताल के 35 गांव के 1831 घरों तक पानी पहुंचाने के लिए भी योजना तैयार करनी होंगी। इस मामले में मैदानों की तुलना में पहाड़ की स्थिति बेहतर है। पहाड़ों में अल्मोड़ा के सात गांव के 345 घर, चमोली के सात गांव के 68 घर, चंपावत के एक गांव के 19 घर, पौड़ी नौ गांव के 419 घर।

जबकि, पिथौरागढ़ के सात गांव के 50 घर, रुद्रप्रयाग के दो गांव के 141 घर, टिहरी के छह गांव के 295 घर, उत्तरकाशी के 11 गांव के 830 घर ही ऐसे हैं, जहां कोई योजना नहीं है। इस मामले में पूरे राज्य में सिर्फ देहरादून और बागेश्वर ही दो ऐसे जिले हैं, जहां शत-प्रतिशत गांवों के लिए पेयजल योजना है। यहां सिर्फ इन योजनाओं से लोगों के घरों को पाइप लाइन से जोड़ा जाना है।

जल जीवन मिशन में जारी हो रहा बजट
सरकार इन गांवों तक योजनाएं पहुंचाने को जल जीवन मिशन में बजट उपलब्ध करा रही है। हरिद्वार, यूएसनगर पर विशेष फोकस है क्योंकि इन गांवों में हैंडपंप के अलावा न सिर्फ ट्यूबवेल तैयार करने हैं, बल्कि ओवरहेड टैंक व पेयजल लाइनें भी बिछाई जानी हैं। अकेले हरिद्वार में ही पेयजल योजनाओं के 173 प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। हरिद्वार के लिए ही 750 करोड़ का बजट चाहिए।

मैंने पेयजल मंत्री का कार्यभार संभालते ही साफ कर दिया था कि सिर्फ नल न लगाए जाएं, पानी भी पहुंचाया जाए। इसके बाद विभाग में दूसरे चरण में पेयजल योजनाओं के लिए युद्धस्तर पर इस्टीमेट तैयार और मंजूर हो रहे हैं। योजनाओं के लिए बजट भी जारी हो रहा है। पिछले कुछ समय में ही करोड़ों का बजट जारी किया जा चुका है। धरातल पर काम भी शुरू हो गया है। 
बिशन सिंह चुफाल, पेयजल मंत्री 

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