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NH-74 मुआवजा घोटाला: निलंबित दोनों आईएएस अफसरों को मिलेगी चार्जशीट

एनएच 74 मुआवजा घोटाले में निलंबित हुए आईएएस अफसरों को अब चार्जशीट का सामना करना पड़ेगा। निलंबन के बाद विस्तृत जांच के लिए वरिष्ठ अफसर को जांच का जिम्मा सौंपा जाएगा। इस निलंबन के खिलाफ अफसर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की शरण ले सकते हैं।

ट्रिब्यूनल से फैसला यदि अफसरों के पक्ष में आता है, तो सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। एनएच 74 मुआवजा घोटाले पर एसआईटी की प्रारंभिक जांच और विभागीय नोटिस के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय नोटिस के बाद अफसरों के जवाब से असंतुष्ट होकर निलंबन की कार्रवाई की गई। इस निलंबन के बाद आने वाले दिन खासे गहमागहमी भरे रहने वाले हैं। सूत्रों ने बताया कि कार्मिक विभाग अब दोनों अफसरों को चार्जशीट देने की तैयारी कर रहा है। अफसरों को एक निश्चित समय के भीतर चार्जशीट का जवाब देना होगा, ताकि विभागीय जांच शुरू हो सके। इससे दोनों अफसरों की मुश्किलें और बढ़ सकती है। सूत्रों का कहना है कि यदि चार्जशीट पर आईएएस अफसरों के जवाब से सरकार संतुष्ट नहीं होती है तो ऐसी दशा में संबंधित अफसरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई जैसे अपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। इससे अफसरों का करिअर भी प्रभावित हो सकता है।

डॉ. पंकज कुमार पांडेय
जन्म- 10 जनवरी, 1976
निवास स्थान- इलाहाबाद, यूपी
बैच- 2005
शैक्षिक योग्यता- एमबीबीएस

मुआवजे के 13 मामलों में घिरे हैं पांडेय
शासन से निलंबित यूएसनगर के पूर्व डीएम और आईएएस अफसर पंकज पांडेय एसआईटी की जांच रिपोर्ट में बुरी तरह घिर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, किच्छा तहसील के बरा गांव में तेरह मामलों में उन पर सरकारी भूमि पर मुआवजा तय करने के आरोप हैं। सरकारी भूमि पर मुआवजा आर्बिर्टेशन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते थे, इसके बावजूद न सिर्फ एसएलएओ बल्कि ऑर्बिर्टेटर के तौर पर खुद पंकज पांडेय ने इन मामलों में प्रतिकर तय किया। आरोप है कि उन्होंने एसएलएओ के अभिनिर्णय आदेश से अधिक प्रतिकर का निर्धारण भी किया। सूत्रों के मुताबिक, इन मामलों में एसएलएओ के अभिनिर्णय आदेश से दस गुना तक मुआवजा ऑर्बिट्रेशन में निर्णित किया गया। वहीं तबादला आदेश होने के बाद भी इन वादों को एक ही दिन में निर्णित कर दिया गया।

चंद्रेश कुमार यादव
जन्म- 11 अगस्त, 1975
निवास- इलाहाबाद, यूपी
बैच- 2006
शैक्षिक योग्यता- एमए हिन्दी

चंद्रेश ने नियम विरुद्ध बांट दिया मुआवजा 
हाईवे घोटाले में तत्कालीन डीएम और ऑर्बिट्रेटर चंद्रेश यादव ने नियम विरुद्ध बैक डेट में 143 कराए मामले, ऑर्बिटे्रशन में आने पर इनमें करोड़ों का मुआवजा देने के आदेश दे दिए थे। सूत्रों के मुताबिक, दभोरामुस्तकम के तीन मामलों में बैक डेट में 143 का कृषि भूमि का भू उपयोग बदल अकृषक दिखाया गया था। इन मामलों में तत्कालीन एसडीएम ने मुआवजा न देने को तत्कालीन एसएलएओ को पत्र भी लिखा था, लेकिन एसएलएओ ने प्रतिकर तय कर दिया। इसके बाद ये मामले ऑर्बिटे्रशन में गए थे। सूत्रों के मुताबिक, एसएलएओ ने 2100 रुपये प्रति वर्ग मीटर दर से मुआवजा तय किया, जबकि ऑर्बिटे्रशन में 7500 की दर से मुआवजा तय कर करीब 36 करोड़ देने के आदेश दिए गए थे। इन मामलों को एसआईटी ने वित्तीय अनियमितता मानकर रिपोर्ट में शामिल किया था।

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  • Web Title:suspended ias officials to face chargesheet