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उत्तराखंड के अर्द्ध नगरीय इलाकों में अब पर्याप्त पानी मिल सकेगा

Trivendra Singh Rawat (Profile Pic)

राज्य के 35 अर्द्धनगरीय (पेरी अरबन) इलाकों को अब हर दिन चारमंजिला तक 16 घंटे पानी मिलेगा। यह दावा सरकार ने उत्तराखंड की नई पेरी अरबन वाटर पॉलिसी में किया है। इस पर कैबिनेट ने मंगलवार को मुहर लगा दी है। इस पॉलिसी में किए गए प्रावधानों पर यकीन करें तो पेरी अरबन इलाकों की योजना पूरी होने के बाद लोगों को भरपूर पानी मिलेगा। अभी जहां पानी एक से दो घंटे के बीच सप्लाई होता है, इस योजना के बाद रोजाना 16 घंटे पानी मिलेगा। प्रेशर भी ऐसा होगा कि बिना मोटर पानी चौथी मंजिल तक पहुंच जाएगा। मौजूदा समय में पेयजल सप्लाई की खराब हालात को देखते हुए सुनने में यह सब महज एक सपना लग रहा है। मगर, अब पानी के सही इस्तेमाल और खर्च के हिसाब-किताब के लिए वाटर मीटर जरूरी कर दिए गए हैं। न सिर्फ एक घर, बल्कि हर मोहल्ले के पानी का बहीखाता तैयार होगा। कॉलोनी की पेयजल सप्लाई पर कितना खर्च हो रहा है, कितनी कमाई होती है, इसका भी ब्योरा रखा जाएगा।

बड़े ट्यूबवेल पर प्रतिबंध निजी बोरिंग पर नकेल
सरकार की योजना शुरू होने के बाद पेरी अरबन इलाकों में किसी भी घर, व्यावसायिक संस्थान में चार इंच व्यास से अधिक आकार का ट्यूबवेल प्रतिबंधित होगा। चार इंच से अधिक पाइप के ट्यूबवेल में एक हॉर्स पावर से ऊपर की मोटर को भी प्रतिबंधित किया गया। ट्यूबवेल होने के बाद भी न्यूनतम पानी बिल का भुगतान करना ही होगा। एनओसी सम्बन्धित विभाग से लेनी होगी। सिर्फ अग्निशमन विभाग को मुफ्त पानी मिलेगा।

अहम बिंदु

  • पूरे उत्तराखंड में 1.08 लाख कनेक्शन देने होंगे 
  • छह साल में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट 
  • पानी न्यूनतम 16 घंटे उपलब्ध कराना जरूरी होगा 
  • पीपीपी मोड के तहत इस योजना का निर्माण होगा 
  • 50 फीसदी पुराने कनेक्शनों में मीटर लगाने होंगे 
  • सभी नए कनेक्शनों में मीटर अनिवार्य

प्रमुख फैसले

  • वीवीआईपी नंबर वाले वाहनों के शुल्क में दस गुना तक बढ़ोतरी 
  • खांडसारी और पावर क्रशर फिर कर सकेंगे गन्ने की पेराई
  • अर्द्ध नगरीय इलाकों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति को जल नीति मंजूर
  • गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान ईको सेंसटिव जोन के दायरे में नहीं आएंगे गांव
  • नंधौर ईको सेंसटिव जोन से तीन  गांवों को हटाने का प्रस्ताव मंजूर
  • फॉरेस्ट गार्ड भर्ती में अब पहले लिखित परीक्षा आयोजित होगी
  • पुरानी धरोहरें संवारेगा उद्योग 
  • लेखा परीक्षा राजपत्रित सेवा नियमावली पर भी कैबिनेट ने लगाई अपनी मुहर
  • उत्तराखंड स्टेट सीड एंड ऑर्गेनिक प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी का ढांचा मंजूर
  • महाविद्यालयों में पुस्तकालय लिपिक के सीधी भर्ती के पदों की नियमावली में संशोधन
  • इंडियन एयरफोर्स और नेवल एकेडमी में चयनित अभ्यर्थियों को भी मिलेगा पुरस्कार
  • उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिकीय वर्गीय अधिष्ठान नियमावली में संशोधन
  • उत्तराखंड न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी

बदलाव
न्यायिक सेवा में नौकरी को पंजीकरण जरूरी नहीं

देहरादून। कैबिनेट ने उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिक संवर्गीय अधिष्ठान में भी संशोधन कर दिया है। लिपिक पद के लिए रोजगार कार्यालय में पंजीकरण की शर्त खत्म कर दी गई है। दूसरे विभागों के लिए सरकार यह बदलाव पहले ही कर चुकी है। इसके अलावा न्यायिक सेवा नियमावली में बदलाव करते हुए यूपी की जगह उत्तराखंड और इलाहाबाद हाईकोर्ट की जगह नैनीताल हाईकोर्ट करने को भी मंजूरी दी गई। प्रमोशन की सीमा पांच साल से घटाकर चार साल की गई है।

वाटर कॉरिडोर
कॉरिडोर वन:
दून-ऋषिकेश (नौ पेयजल योजना: ढालवाला, रायपुर, नत्थनपुर, नथुवावाला, ऋषिकेश देहात, गुमानीवाला, प्रतीतनगर, हरिपुरकलां और खड़गमाफी)
कॉरिडोर दो: हरिद्वार-रुड़की (आठ पेयजल योजना: ढंढेरा, शहदपुरा, नागला इमरती, भगेड़ी महापदपुर, मोहनपुरा, रावली महदूद, बहादराबाद और जगजीतपुर)
कॉरिडोर तीन: हल्द्वानी काठगोदाम (सात पेयजल योजनाएं: फतेहपुर रेंज, मुखानी, हल्द्वानी तल्ली, बिठुरिया नंबर वन, कुसुमखेड़ा, बमोरी तल्ली और गौजाजली उत्तर)

राज्य के इन इलाकों को मिलेगा फायदा
देहरादून:
हरिपुरकलां, जीवनगढ़, सेंट्रल होपटाउन, रायपुर, नत्थनपुर, मेहंूवाला माफी, नथुवावाला, ऋषिकेश ग्रामीण, गुमानीवाला, प्रतीतनगर और खड़कमाफी
हरिद्वार: सैदपुरा, भंगेरी मोहब्बतपुर, नागला इमरती, ढंढेरा, मोहनपुर, मोहम्मदपुर, रावली महदूद, बहादराबाद और जगजीतपुर
पौड़ी: पदमपुर, काशीरामपुर
टिहरी गढ़वाल: ढालवाला
ऊधमसिंहनगर: उमरउखुर्द, महोलिया, बंडिया, कंचल गुसाईं और नागल
नैनीताल: फतेहपुर रेंज, बमोली तल्ली बंदोबस्ती, हल्द्वानी तल्ली, मुखानी, बिठोरिया, कुसुमखेड़ा और गौजाजली उत्तर

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  • Web Title:sub urban areas to get ample amount of water in uttarakhand