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18 जनवरी, 2021|11:31|IST

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UOU: छात्रों की कैसे होगी पढ़ाई जब नहीं मिल रही हैं किताबें,अध्ययन केंद्रों में भी नहीं निकल रहा हल 

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में इस साल रिकॉर्ड दाखिले हुए हैं, लेकिन पुस्तक वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं आया है। विश्वविद्यालय में किताबों के वितरण की व्यवस्था हमेशा से लचर रही है। छात्र संख्या बढ़ने के बावजूद कार्यशैली में सुधार न होने की वजह से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। वे किताबों के लिए अध्ययन केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यूओयू में जुलाई से शुरू हुई ग्रीष्मकालीन सत्र की प्रवेश प्रक्रिया 31 दिसंबर तक चली। इस छह महीने में 74 हजार से दाखिले हुए हैं। यूओयू की स्थापना के बाद प्रवेश का यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है।

यूओयू सूत्रों की मानें तो किताब वितरण में 4 कर्मचारी लगाए गए हैं। पूरा स्टाफ होने पर प्रतिदिन करीब 400 छात्रों की किताबें पैक करने के बाद रवाना की जा रही हैं। जनवरी महीने में 17 दिन के भीतर 9 हजार से ज्यादा छात्रों की किताबें डिलीवर करने की बात सामने आई है। एक अनुमति आंकड़े के मुताबिक 35 हजार से ज्यादा छात्रों तक किताबें पहुंचाई जा चुकी हैं। अगर दिसंबर माह में हुए करीब 9 हजार दाखिलों को छोड़ दें तो नवंबर अंत तक 66 हजार छात्रों ने प्रवेश लिया। इनमें से अभी 31 हजार छात्रों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। 

कम स्टाफ किताब वितरण में सबसे बड़ी बाधा बना  
कुमाऊं विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में प्राइवेट परीक्षा बंद होने के बाद यूओयू की छात्रा संख्या हर साल बढ़ रही है। छात्र संख्या में इजाफा होने के बावजूद पुस्तक वितरण प्रणाली को विश्वविद्यालय प्रशासन मजबूत नहीं कर पाया है। पुस्तक वितरण के काम में 4 कर्मचारी लगाए गए हैं। इतनी बड़ी छात्र को समय किताब मुहैया कराने के लिए इतना कम स्टाफ होने अपने आप व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। 

कोरोना के उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों में भी हम लगातार दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों तक किताबें पहुंचा रहे हैं। सेमेस्टर कक्षाओं के छात्रों को पहले किताब मुहैया करवाई जा रही हैं। जनवरी में अभी तक 9 हजार से ज्यादा छात्रों तक किताबें पहुंचाई जा चुकी हैं। 
डॉ. वीरेंद्र कुमार, पुस्तक वितरण प्रभारी, यूओयू 

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  • Web Title:students not getting course books despite admission in uttarakhand open university