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Hindi News उत्तराखंडSSP साहब को कोतवाली पहुंचने में लगे 5 घंटे, हल्द्वानी में दो नाबालिग छात्राओं से जुड़ा मामला

SSP साहब को कोतवाली पहुंचने में लगे 5 घंटे, हल्द्वानी में दो नाबालिग छात्राओं से जुड़ा मामला

पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारियों से छीना-छपटी और धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। करीब पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद एसएसपी ने बरामदगी का आश्वासन दिया।

SSP साहब को कोतवाली पहुंचने में लगे 5 घंटे, हल्द्वानी में दो नाबालिग छात्राओं से जुड़ा मामला
Himanshu Kumar Lallहल्द्वानी, हिन्दुस्तानMon, 24 Jun 2024 02:18 PM
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हल्द्वानी के वनभूलपुरा थाना क्षेत्र से बीते गुरुवार को लापता हुईं दो नाबालिग छात्राओं की बरामदगी को लेकर सामाजिक संगठनों के लोगों ने रविवार को एसएसपी दफ्तर और कोतवाली का घेराव कर दिया। एसएसपी के मौके पर नहीं आने पर प्रदर्शनकारी भड़क गए और हंगामा शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने इस मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों की एक नहीं सुनी और वह एसएसपी को बुलाने की जिद पर अड़ गए। करीब साढ़े तीन घंटे चले हंगामे और हनुमान चालीसा के पाठ के बाद भी जब एसएसपी नहीं पहुंचे तो वह कोतवाली के सामने उनका पुतला फूंकने पहुंच गए।

पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारियों से छीना-छपटी और धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। करीब पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद एसएसपी ने मौके पर पहुंच कर छात्राओं की 24 घंटे में बरामदगी के आश्वासन दिया। इसके बाद धरना खत्म किया गया।

एसएसपी को कोतवाली पहुंचने में लग गए पांच घंटे
पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी पाटने और जनता में पुलिस का इकबाल बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बीते दिनों प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को गांव-गांव तक पहुंचने और जनसंवाद बढ़ाने के आदेश दिए हैं।

इसके उलट रविवार को हल्द्वानी के इस संवेदनशील मामले में एसएसपी को प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए आने में पांच घंटे लग गए। तब तक एसपी सिटी, सीओ और कोतवाल नाराज लोगों को मनाने में नाकाम साबित हुए थे।

बार-बार वीवीआईपी ड्यूटी का हवाला देने से हालात बिगड़ते चले गए। प्रदर्शनकारी शुरू से ही मांग कर रहे थे कि एसएसपी उनसे वार्ता के लिए आएं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, रविवार को कोतवाली स्थित पुलिस बहुउद्देशीय भवन के बाहर शुरू हुए प्रदर्शन की जानकारी अधीनस्थ अधिकारियों ने एसएसपी को दे दी थी।

स्थानीय स्तर पर मौजूद अधिकारी लगातार उनके संपर्क में भी थे और पल-पल का अपडेट एसएसपी को दे रहे थे। मामला दो नाबालिग छात्राओं की गुमशुदगी और चार दिन बाद भी पुलिस के खाली हाथ होने से जुड़ा था। चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली होने को लेकर लोग आक्रोश में थे।

विवाद शांत कराने के लिए एसपी सिटी, सीओ सिटी और कोतवाल ने पांच बार बातचीत की कोशिश की गई लेकिन हर बार वार्ता विफल रही। इस दौरान भी एसएसपी के आने को लेकर संशय बना रहा। मौजूद पुलिस अधिकारी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे कि एसएसपी मुलाकात करने आएंगे भी।

ऐसे में प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ता गया। हालात यह हो गए कि शहर एक हिस्से में कुछ लोगों ने अराजकता की कोशिश शुरू कर दी। जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस की पुतला दहन के समय नोकझोंक हुई।

उसी समय काठगोदाम क्षेत्र में कुछ अराजक तत्वों ने हाइडिल गेट चौराहे के पास जूस के एक ठेले को पलटकर जूस वाले को भगा दिया। पास में ही नाई की दुकान में घुसकर भी अराजकता की। एसएसपी को वार्ता के लिए पहुंचने में इतनी देर लगने से शहर में एक बार फिर माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा।

कप्तान का ये कैसा रवैया,जो हमें नहीं सुन सकते’
कोतवाली परिसर में रविवार को एसएसपी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे सामाजिक संगठन के लोगों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब बार-बार एसएसपी को बुलाने की मांग करने के बाद भी यहां मौजूद अधिकारी उन्हें यही हवाला देते रहे कि एसएसपी वीवीआईपी ड्यूटी में नैनीताल में हैं।

इससे नाराज लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। यहां तक कि बहुउद्देशीय भवन परिसर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। प्रदर्शनकारियों ने जब दोपहर बाद 330 बजे तक एसएसपी को बुलाने की अपनी ‘डेड लाइन’ मौजूद अफसरों के सामने रखी तो एसपी सिटी प्रकाश चंद और सीओ नितिन लोहनी प्रदर्शनकारियों के बीच जमीन पर जा बैठे और बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश की।

प्रदर्शनकारियों को बार-बार यही जवाब मिला कि एसएसपी वीवीआईपी ड्यूटी में नैनीताल में हैं। इससे भड़के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ‘एसएसपी का यह कैसा रवैया है, जो हमसे मिलकर हमारी बात भी नहीं सुन सकते हैं।’ इसके बाद अन्य ने भी बोलना शुरू किया।

यातायात व्यवस्था का जायजा लेने चौराहों पर पहुंचने को लेकर भी तंज कसते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ‘एसएसपी का काम केवल ट्रैफिक जाम के बीच फोटो खिंचाना नहीं जनता की सुनवाई करना भी है।’यहां कार्तिक हर्बोला, जोगेंद्र राणा, रूपेंद्र नागर, कमल मुनि आदि रहे।

पुलिस अपने स्तर पर हालात संभालने में जुटी
हालांकि एसपी सिटी प्रकाश चंद, सीओ सिटी नितिन लोहनी, कोतवाल उमेश कुमार मलिक और एसओ वनभूलपुरा नीरज भाकुनी इस दौरान अपने स्तर से हालात संभालने के प्रयास करते रहे। हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।

प्रदर्शनकारियों से वार्ता के लिए आने में विलंब के संबंध में एसएसपी पीएन मीणा का पक्ष जानने के लिए उनसे मोबाइल कॉल और व्हाटसऐप मैसेज के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने हमेशा की तरह रविवार को भी न तो फोन उठाया और न ही कोई दिया।

पांच दौर की बातचीत भी नहीं आई काम
एक ओर प्रदर्शनकारी एसएसपी को बुलाने की मांग कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर अफसर एसएसपी की वीवीआईपी ड्यूटी होने का हवाला देकर मामला शांत करने में जुटे थे। इधर, पुलिस अधिकारियों ने पहले खुद बातचीत की।

लेकिन तीन दौर की बातचीत विफल रही। इसके बाद एसएसपी से फोन पर भी दो बार बातचीत कराई गई, जिसमें एसएसपी ने सोमवार को मुलाकात करने की बात कही, पर प्रदर्शनकारी नहीं माने और बाद की दो वार्ताएं भी फेल हो गईं।

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