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इंटरनेट के अधूरे ज्ञान से मां का दुश्मन बना बेटा! देहरादून में गला घोंटकर किया मर्डर

चंपावत के कठाड़ निवासी माधो सिंह पिछले साल सितंबर में प्रेमनगर शिफ्ट हुए थे। दिसंबर से बेटा माता-पिता के साथ रहने लगा। प्रेमनगर थानाध्यक्ष गिरीश नेगी ने बताया कि अजय अल्सर की बीमार से पीड़ित था।

इंटरनेट के अधूरे ज्ञान से मां का दुश्मन बना बेटा! देहरादून में गला घोंटकर किया मर्डर
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानSun, 28 Jan 2024 12:41 PM
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बेटे द्वारा मां की हत्या से हर कोई स्तब्ध है। आरोपी एसएससी पास है और वह बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहा था। इंटरनेट से अधूरा ज्ञान लेकर उसने मां को अपनी बीमारी के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। क्रोध इतना प्रचंड था कि वो हत्या कर बैठा। देहरादून में बेटे ने मां का गला घोंटकर मर्डर कर दिया।

चंपावत के कठाड़ निवासी माधो सिंह पिछले साल सितंबर में प्रेमनगर शिफ्ट हुए थे। दिसंबर से बेटा अजय भी माता-पिता के साथ रहने लगा। प्रेमनगर थानाध्यक्ष गिरीश नेगी ने बताया कि अजय काफी समय से अल्सर की बीमारी से पीड़ित है।

उसका इलाज चल रहा था। इस बीच, उसने इंटरनेट पर बीमारी के कारण ढूंढने शुरू कर दिए। उसे पता चला कि खाने में धीमा जहर भी बीमारी का एक कारण हो सकता है। लिहाजा, वह मां पर शक कर बैठा और आखिर में उसने मौत के घाट उतार दिया।

शुरू में अजय ने बुनी आत्महत्या की कहानी पुलिस के अनुसार, परिजनों के प्रति पहले से ही अजय का व्यवहार ठीक नहीं था। यही कारण रहा कि जब शनिवार सुबह अजय ने भाई से मां की आत्महत्या की बात कही तो उसने भरोसा नहीं किया। उसने पिता को फोन पर बाकायदा यह कहा कि वो घर पर अकेले न जाएं। अजय उन पर भी हमला कर सकता है।

पहले भी रिश्तों का कत्ल
दून में रिश्तों के कत्ल की यह पहली वारदात नहीं है। 18 नवंबर 2023 को बलबीर रोड पर एक युवक ने बिस्तर पर सो रही मां की हत्या कर दी थी। इससे पहले दून के अनुपमा हत्याकांड ने हर किसी को हिलाकर रख दिया था। 29 अगस्त 2022 को रानीपोखरी में एक परिवार के पांच सदस्यों के कत्ल से भी हर कोई सहम गया था।

एलोपैथी में स्लो पॉयजन जैसी मेडिकल टर्म नहीं है। कैमिकल पॉयजन पाया जाता है। ऐसी भ्रामक जानकारी से दूर रहें।
डॉ. विपुल कंडवाल, वरिष्ठ गैस्ट्रो सर्जन

मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति किसी की भी बात पर आसानी से विश्वास कर लेता है। शक की वजह से भी ऐसा हो जाता है।
शक में व्यक्ति आत्मघाती कदम भी उठा लेता है। 
डॉ. निशा सिंघला वरिष्ठ मनोचिकित्सक

 

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