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खूब सोए, एन्जॉय किए और... सुरंग में फंसे मजदूरों के 17 दिन कैसे बीते? एक ख्याल जो बार-बार कर देता था परेशान

Silkyara tunnel: विशाल ने बताया, 'हम सब ने हिम्मत बनाए रखे। अंदर हम सभी ने मिलकर उस पल को भी एन्जॉय किया। ज्यादातर टाइम हमलोगों ने सो कर निकाला। जितने भी हम भाई थे सब अंदर मिलकर बैठते थे।'

खूब सोए, एन्जॉय किए और... सुरंग में फंसे मजदूरों के 17 दिन कैसे बीते? एक ख्याल जो बार-बार कर देता था परेशान
Devesh Mishraलाइव हिंदुस्तान,उत्तरकाशीFri, 01 Dec 2023 04:49 PM
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Silkyara tunnel news: उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमवीरों को मंगलवार की रात सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। देश-दुनिया के लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो सभी की आंखें खुशी से नम हो गईं। यह भगवान, इंसान और विज्ञान पर भरोसे की जीत थी। मजदूरों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद सभी स्वस्थ पाए गए, उन्हें अपने-अपने घर जाने की परमिशन दे दी गई। ऐसे में अब हर कोई उन 422 घंटे की कहानी जानना चाहता है जब ये मजदूर सूरज की रोशनी से दूर टनल में फंसे रहे। हिमाचल प्रदेश के विशाल कुमार भी सुरंग में फंस गए थे। उन्होंने अब अपनी मोटिवेट कर देने वाली कहानी सुनाई है।

खूब सोए, एन्जॉय किए और...
विशाल ने बताया, 'हम सब ने हिम्मत बनाए रखा। अंदर हम सभी ने मिलकर उस पल को भी एन्जॉय किया। ज्यादातर टाइम हमलोगों ने सो कर निकाला। जितने भी हम भाई थे सब अंदर मिलकर बैठते थे और बातचीत करते थे। ऐसे ही हमलोगों अपना टाइम निकालते थे।'

सोचे थे 5-10 दिन लगेंगे लेकिन...
विशाल ने आगे बताया, 'हम लोगों को नहीं पता था कि इतना टाइम लगेगा। हमने सोचा था कि ज्यादा से ज्यादा 5-10 दिन लगेंगे। हमारे पीएम सर (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी), उत्तराखंड के सीएम सर, कंपनी के वर्कर, सभी ने हमारा सहयोग किया। हमें अंदर हर तरह की सुविधा दी जा रही थी।'

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हादसे वाले दिन क्या हुआ?
विशाल ने बताया, 'हमें शुरुआत में यह पता नहीं था कि कितना मीटर मलबा गिरा है। अंदर एक पाइप होती है, पानी को बाहर निकालने वाली। सबसे पहले हम लोगों ने उसे खोला। फिर मैंने अपने लिए सोने का बंदोबस्त किया क्योंकि पूरी रात मैंने ड्यूटी की थी। मुझे भूख और नींद दोनों लग रही थी। इस दौरान बाहर से कोई भी कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा था।'

एक ख्याल जो बार-बार कर देता था परेशान
मलबा गिरने के करीब 24 घंटे बाद तक बाहर से कोई संपर्क नहीं हो पाया। अंदर फंसे मजदूरों ने पाइप खोलकर इस हादसे का सिग्नल दिया। सिग्नल मिलते ही रेस्क्यू टीमें उन्हें बचाने में जुट गईं। विशाल ने बताया, हादसे के तुरंत बाद हम सब एक जगह बैठे। वो टाइम हमलोगों के लिए बहुत कठिन था। मन में बहुत ख्याल आ रहे थे... कि बाहर से कुछ हो रहा है या नहीं हो रहा है। क्या हो रहा है बाहर? क्या हम सुरंग से निकल कर बाहर जा पाएंगे?' गौरतलब है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन 17 दिनों तक चला। मंगलवार की रात एक-एक कर सभी मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है। 

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